जमुई: बिहार के जमुई जिले में बीती रात एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसे याद कर आज भी यात्रियों की रूह कांप जा रही है। सिमुलतला और लहाबन रेलवे स्टेशनों के बीच एक भीषण रेल हादसा होते-होते रह गया। अगर घड़ियों की सुई में महज 3 से 4 मिनट का फेरबदल होता, तो आज भारतीय रेल के इतिहास में एक और दिल दहला देने वाली त्रासदी दर्ज हो जाती।
गोरखपुर से कोलकाता जा रही 15050 पूर्वांचल एक्सप्रेस में सवार हजारों यात्रियों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। मौत उनके इतने करीब से गुजर गई कि इसका अंदाजा उन्हें तब लगा जब ट्रेन सुरक्षित स्टेशन पहुंच गई।
रोंगटे खड़े कर देने वाला वो मंजर
घटनास्थल का नजारा इतना भयावह है कि इसे देखकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाए। आसनसोल से सीतामढ़ी की ओर जा रही सीमेंट से लदी एक मालगाड़ी (अप लाइन पर) अचानक बेकाबू होकर पटरी से उतर गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि मालगाड़ी के भारी-भरकम डिब्बे अपनी पटरी को उखाड़ते हुए बगल वाली ‘डाउन लाइन’ पर जा गिरे।
डराने वाली बात यह है कि इसी ‘डाउन लाइन’ से महज कुछ ही पल पहले पूर्वांचल एक्सप्रेस गुजरी थी। लोहे की पटरियां कागज की तरह मुड़ गई थीं और सीमेंट की बोरियों से लदी बोगियां दूसरी तरफ बिखरी पड़ी थीं। अगर उस वक्त पूर्वांचल एक्सप्रेस वहां से गुजर रही होती, तो टक्कर इतनी भीषण होती कि जान-माल के नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
मौत और जिंदगी के बीच सिर्फ 180 सेकंड!
रेलवे से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों ने इस घटना की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। समय के खेल ने कल हजारों जिंदगियां बचा लीं:
-
रात 11:01 बजे: गोरखपुर-कोलकाता पूर्वांचल एक्सप्रेस (15050) सिमुलतला स्टेशन से डाउन लाइन पर रवाना होती है।
-
रात 11:02 बजे: सीमेंट से लदी मालगाड़ी लहाबन स्टेशन से अप लाइन पर गुजरती है।
-
हादसे का वक्त: इसके ठीक कुछ मिनटों बाद, सिमुलतला से करीब 3.5 किलोमीटर दूर मालगाड़ी बेपटरी हो जाती है और उसके डिब्बे डाउन ट्रैक को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं।
जरा सोचिए, अगर पूर्वांचल एक्सप्रेस अपनी रफ्तार में थोड़ी भी धीमी होती या मालगाड़ी कुछ सेकंड पहले बेपटरी हुई होती, तो मंजर क्या होता? वह डाउन ट्रैक, जिस पर मालगाड़ी के डब्बे गिरे, वहां उस वक्त हजारों यात्रियों से भरी ट्रेन मौजूद होती।
‘मौत का गलियारा’ बन गई थी पटरियां
सिमुलतला और लहाबन के बीच की करीब 9 किलोमीटर की दूरी बीती रात एक ‘डेंजर जोन’ में तब्दील हो गई थी। रेलवे के जानकारों का कहना है कि जिस तरह से मालगाड़ी के वैगन ट्रैक से छिटककर दूसरी तरफ गिरे हैं, वह बताता है कि रफ्तार और दबाव कितना ज्यादा रहा होगा।
आज सुबह जब सूरज निकला, तो रेलवे ट्रैक पर मलबे का ढेर लगा था, लेकिन गनीमत यह रही कि किसी की जान नहीं गई। इसे यात्रियों की किस्मत कहें या ईश्वर की असीम कृपा, कि एक बहुत बड़ी रेल दुर्घटना होने से पहले ही टल गई। फिलहाल रेलवे प्रशासन ट्रैक को साफ करने और यातायात सामान्य करने में जुटा है, साथ ही हादसे के कारणों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
