साल 2025 का अंत होते-होते दक्षिण एशियाई राजनीति में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने हर तरफ हलचल मचा दी। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने बेबाक अंदाज और कूटनीतिक कौशल के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार उनकी एक ‘मुस्कुराहट’ और ‘हाथ मिलाने’ के वाकये ने पाकिस्तान के पसीने छुड़ा दिए हैं। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ ने जयशंकर को एक ‘चालाक नेता’ करार दिया है।
आखिर ढाका में हुआ क्या था?
बात 31 दिसंबर 2025 की है। मौका था बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया को श्रद्धांजलि देने का। ढाका में आयोजित इस कार्यक्रम में दक्षिण एशिया के लगभग सभी प्रमुख देशों के प्रतिनिधि जुटे थे। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर वहां पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। जयशंकर और पाकिस्तान के नेशनल असेंबली स्पीकर अयाज़ सादिक़ के बीच आमना-सामना हुआ और दोनों ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया।
पाकिस्तान में क्यों मची है खलबली?
इस हाथ मिलाने की तस्वीर जैसे ही वायरल हुई, पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। पाकिस्तान में इस मुलाक़ात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। वहां के मीडिया और राजनीतिक जानकारों के बीच सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि हाथ मिलाने की पहल आखिर किसने की?
पाकिस्तानी हलकों में दावा किया जा रहा है कि भारतीय विदेश मंत्री ने खुद आगे बढ़कर अयाज़ सादिक़ से हाथ मिलाया था। इसी व्यवहार को लेकर अयाज़ सादिक़ ने जयशंकर को ‘चालाक’ बताया है। कूटनीति की भाषा में इसे ‘सॉफ्ट पावर’ का इस्तेमाल माना जा रहा है, जहाँ बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘तस्वीरों की जंग’
दिलचस्प बात यह है कि इस मुलाक़ात को लेकर भारत और पाकिस्तान के रुख में बड़ा अंतर देखने को मिला:
जयशंकर का अंदाज: विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ढाका दौरे की कई जानकारियां और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, लेकिन उन्होंने अयाज़ सादिक़ के साथ हाथ मिलाने वाली घटना का ज़िक्र तक नहीं किया। इसे जयशंकर की ‘रणनीतिक खामोशी’ के तौर पर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान का उत्साह: दूसरी ओर, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर इस मुलाक़ात की कई तस्वीरें पोस्ट कर दीं। पाकिस्तान की ओर से किए गए दावों में बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया गया कि जयशंकर खुद चलकर सादिक़ के पास आए थे।
क्या यह महज़ एक शिष्टाचार था?
जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे शिष्टाचार आम होते हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक ‘हैंडशेक’ भी हेडलाइन बन जाता है। पाकिस्तान इसे अपनी कूटनीतिक जीत की तरह पेश करने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारतीय खेमा इसे एक सामान्य शिष्टाचार मानकर चल रहा है।
हालांकि, पाकिस्तानी स्पीकर का जयशंकर को ‘चालाक’ कहना यह दर्शाता है कि पड़ोसी देश भारतीय विदेश मंत्री की हर चाल और हर इशारे को कितनी बारीकी से देख रहा है। साल के आखिरी दिन हुई यह छोटी सी मुलाक़ात आने वाले वक्त में दोनों देशों के रिश्तों की बर्फ पिघलाएगी या यह सिर्फ एक कूटनीतिक दांव था, यह तो वक्त ही बताएगा।








