भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार शाम अपने हेवी-ड्यूटी ‘बाहुबली’ रॉकेट LVM3-M5 से नौसेना के लिए समर्पित संचार उपग्रह CMS-03 (GSAT-7R) का सफल प्रक्षेपण किया। 4,410 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट हिंद महासागर क्षेत्र में हाई-कैपेसिटी टेलीकॉम कवरेज देगा और नौसेना की कनेक्टिविटी कई गुना बढ़ाएगा। यह 2013 में लॉन्च हुए GSAT-7 (रुक्मिणी) को रिप्लेस करेगा और अनुमानित 15 वर्षों तक सेवा देगा।
Highlights
- ISRO ने CMS-03 (GSAT-7R) का सफल लॉन्च किया
- भारतीय नौसेना के सुरक्षित संचार के लिए गेम-चेंजर
- हिंद महासागर क्षेत्र में हाई-बैंडविड्थ कवरेज
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से शाम 5:26 बजे LVM3-M5 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) ने CMS-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया, जहां से यह आगे जियोस्टेशनरी ऑर्बिट (GEO) की ओर बढ़ेगा। लगभग 4,410 किलोग्राम वजन वाले इस स्वदेशी संचार उपग्रह का फोकस हिंद महासागर क्षेत्र में निर्बाध, सुरक्षित और स्थिर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है, ताकि समुद्र में तैनात भारतीय नौसेना के सभी एसेट्स एक मजबूत नेटवर्क पर लिंक रहें।
इसे ISRO का ‘बाहुबली’ रॉकेट इसलिए कहा जाता है क्योंकि LVM3 ने अपनी भरोसेमंद क्षमता कई मिशनों में साबित की है। शक्तिशाली पेलोड लिफ्टिंग और सटीक इंजेक्शन की वजह से LVM3 भारतीय हैवी सैटेलाइट लॉन्च का मुख्य आधार बन चुका है। CMS-03 के साथ इस रॉकेट ने एक और महत्वपूर्ण रक्षा-संचार मिशन को सफल अंजाम दिया।
CMS-03 के पेलोड में ऐसे उन्नत ट्रांसपोंडर्स लगे हैं जो कई संचार बैंड्स पर वॉयस, डेटा और वीडियो लिंक सपोर्ट करते हैं। इससे युद्धपोतों, पनडुब्बियों, नौसैनिक विमानों और मैरिटाइम ऑपरेशन सेंटर्स के बीच रीयल-टाइम, सुरक्षित और उच्च बैंडविड्थ वाला संपर्क संभव होगा। उच्च क्षमता वाली बैंडविड्थ से लंबी दूरी पर भी सिग्नल क्वालिटी स्थिर रहती है, जो ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन और मिशन-क्रिटिकल निर्णयों के लिए जरूरी है।
इस सैटेलाइट से दूरदराज़ समुद्री क्षेत्रों तक डिजिटल पहुंच मजबूत होगी। सुरक्षा जरूरतों के साथ-साथ नागरिक एजेंसियों को भी फायदा मिलेगा और कई रणनीतिक अनुप्रयोगों में सुधार आएगा। CMS-03, पुराने GSAT-7 (रुक्मिणी) की जगह ले रहा है, जिसने भारतीय नौसेना के लिए वर्षों तक भरोसेमंद बैकबोन का काम किया और वॉरशिप्स, सबमरीन, एयर एसेट्स तथा शोर-बेस्ड कमांड्स को सुरक्षित रीयल-टाइम लिंक मुहैया कराए।
GTO में पहुंचने के बाद, उपग्रह अपने ऑनबोर्ड इंजन की मदद से जियोस्टेशनरी ऑर्बिट तक जाएगा—यह कक्षा भूमध्य रेखा से 35,786 किमी ऊपर होती है। GEO में उपग्रह पृथ्वी के घूमने के साथ सिंक में एक ही बिंदु पर स्थिर दिखाई देता है, जिससे 24×7 कवरेज मिलती है। यही स्थिरता नौसेना के लिए लगातार, बिना ब्रेक वाले कम्युनिकेशन लिंक सुनिश्चित करती है, खासकर तब जब फ्लीट का फैलाव बड़े समुद्री क्षेत्र में हो।
ISRO ने इससे पहले भी हेवी कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। 5 दिसंबर 2018 को फ्रेंच गुयाना के कौरू से Ariane-5 VA-246 रॉकेट द्वारा GSAT-11 (5,854 किग्रा) को प्रक्षेपित किया गया था। CMS-03 का लॉन्च, भारतीय धरती से हेवी कम्युनिकेशन क्षमताओं को और परिपक्व बनाता है और रक्षा-केंद्रित अंतरिक्ष अवसंरचना को नया बल देता है।
कुल मिलाकर, CMS-03 (GSAT-7R) भारतीय नौसेना के लिए एक कम्युनिकेशन फोर्स-मल्टिप्लायर साबित होगा। हाई-बैंडविड्थ, सुरक्षित और विश्वसनीय नेटवर्क के साथ समुद्र में चल रहे जटिल ऑपरेशंस को तेज और सटीक समन्वय मिलेगा। आने वाले वर्षों में यह उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस को नई ऊंचाई देगा।
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