तेहरान/तेल अवीव: मध्य पूर्व (Middle East) से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। इजरायल ने एक बेहद गुप्त और सटीक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी को मौत के घाट उतार दिया है। यह हमला उस समय हुआ जब मुस्लिम समुदाय का पवित्र महीना रमजान चल रहा था। इस ऑपरेशन की जो परतें अब खुल रही हैं, वो किसी हॉलीवुड की थ्रिलर फिल्म से कम नहीं हैं।
30 मिसाइलें और एक साथ 40 अफसरों का अंत
जानकारी के मुताबिक, तेहरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके पाश्चर स्ट्रीट के पास स्थित खामेनी के कार्यालय को निशाना बनाया गया। जिस वक्त यह हमला हुआ, खामेनी वहां ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं और सैन्य अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक कर रहे थे। इजरायल ने एक के बाद एक 30 मिसाइलें दागकर पूरे परिसर को खंडहर में तब्दील कर दिया। इस भीषण हमले में खामेनी समेत ईरान के 40 शीर्ष अधिकारी मारे गए हैं।
मोसाद और यूनिट 8200 का डिजिटल जाल
इजरायल इस हमले की तैयारी पिछले कई सालों से कर रहा था। इस पूरे ऑपरेशन के पीछे इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) और उसकी साइबर विंग यूनिट 8200 का दिमाग था। सूत्रों के मुताबिक, इजरायली हैकर्स ने तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों को हैक कर लिया था। इन कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों को एन्क्रिप्ट करके सीधे तेल अवीव और दक्षिणी इजरायल में स्थित सर्वर्स पर भेजा जा रहा था।
याद दिला दें कि कुछ समय पहले लेबनान में भी इजरायल ने पेजर हैक करके धमाके किए थे, जिसने हिजबुल्लाह की कमर तोड़ दी थी। अब वही तकनीक और भी बड़े स्तर पर ईरान में इस्तेमाल की गई।
‘पैटर्न ऑफ लाइफ’: CIA ने ऐसे की मदद
इस मिशन में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने भी पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाई। इजरायल ने खास कैमरों की मदद से यह पता लगाया कि खामेनी के बॉडीगार्ड्स और उनके ड्राइवर अपनी गाड़ियां कहां पार्क करते हैं। खुफिया भाषा में इसे “पैटर्न ऑफ लाइफ” कहा जाता है।
इजरायल को यह पता चल चुका था कि खामेनी कब दफ्तर आते हैं, किस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं और उनकी सुरक्षा का घेरा कैसा होता है। हमले के वक्त इजरायल ने पाश्चर स्ट्रीट के पास के मोबाइल टावरों को भी हैक कर लिया था, ताकि सुरक्षाकर्मियों के फोन व्यस्त हो जाएं और उन्हें हमले की भनक तक न लगे।
“तेहरान को भी यरूशलेम की तरह जानते हैं”
एक इजरायली खुफिया अधिकारी ने गर्व से कहा, “हम तेहरान के हर कोने को वैसे ही पहचानते हैं जैसे यरूशलेम को। जब आप किसी जगह को इतनी गहराई से जानते हैं, तो वहां होने वाली छोटी सी हलचल भी पकड़ में आ जाती है।” इजरायल ने डेटा पॉइंट्स और सोशल नेटवर्क एनालिसिस जैसी गणितीय पद्धतियों का इस्तेमाल करके खामेनी को ट्रैक किया।
खामेनी का 37 साल का सफर: क्रांति से सत्ता तक
अयातुल्ला अली खामेनी का अंत ईरान के एक युग का अंत है। 1989 में रुहोल्लाह खोमेनी की मृत्यु के बाद उन्होंने ईरान की कमान संभाली थी।
1979 की क्रांति: शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को सत्ता से हटाने में खामेनी की अहम भूमिका थी।
राष्ट्रपति से ‘रहबर’ तक: 1981 में वे ईरान के राष्ट्रपति बने और 8 साल तक इस पद पर रहे। इसके बाद वे देश के सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ नियुक्त हुए।
विवाद और कट्टरता: खामेनी को उनके समर्थक इस्लामी शासन का रक्षक मानते थे, जबकि विरोधी उन्हें एक सख्त और कट्टर तानाशाह के रूप में देखते थे।
खामेनी अक्सर सार्वजनिक रूप से कहते थे, “मेरी मौत से कोई फर्क नहीं पड़ता।” लेकिन जानकारों का मानना है कि उनका जाना ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति को पूरी तरह बदल देगा।
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