तेल अवीव में एक बड़ा सियासी और सैन्य विवाद खड़ा हो गया है। इसराइल के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने साफ कहा है कि ग़ज़ा में बचे हुए बंधकों की रिहाई के लिए डील तैयार है और अब फ़ैसला प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के हाथों में है।
हमास से डील का प्रस्ताव
इसराइली मीडिया चैनल 13 की रिपोर्ट के मुताबिक़, ज़मीर ने बताया कि सौदे की शर्तें तय हो चुकी हैं। क़तर और मिस्र जैसे मध्यस्थों ने जो नया प्रस्ताव पेश किया है, उसे हमास पहले ही मान चुका है। अब इसराइल की सुरक्षा कैबिनेट मंगलवार को इस पर चर्चा करेगी।
प्रस्ताव के मुताबिक़, शुरुआती 60 दिन के युद्धविराम में हमास दो चरणों में आधे बंधकों को छोड़ेगा और फिर स्थायी युद्धविराम पर बातचीत होगी। लेकिन नेतन्याहू इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि समझौता तभी मान्य होगा जब सभी बंधकों को एक साथ रिहा किया जाए।
सड़क पर उतरे लोग

ग़ज़ा युद्ध के खिलाफ इस महीने की शुरुआत में लाखों लोग तेल अवीव की सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि युद्ध तुरंत रोका जाए और बंधकों की रिहाई के लिए हमास से समझौता किया जाए। बंधकों और लापता लोगों के फ़ोरम ने भी ज़मीर के बयान का स्वागत करते हुए कहा, “ये वही बात है जिसकी मांग ज्यादातर इसराइली जनता कर रही है।”
पत्रकारों की मौत और हमला
सोमवार को ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी हिस्से में नासेर अस्पताल पर इसराइली हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें चार पत्रकार भी शामिल थे। इनमें रॉयटर्स का एक कैमरामैन, और अल जज़ीरा, एसोसिएटेड प्रेस व एनबीसी से जुड़े पत्रकार शामिल हैं।
आईडीएफ़ ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच शुरू कर दी गई है और “निर्दोष लोगों की मौत पर खेद” जताया है।
नेतन्याहू बनाम सेना प्रमुख
प्रधानमंत्री नेतन्याहू बार-बार कह रहे हैं कि “हमास को हराना ही होगा।” लेकिन ज़मीर समेत कई लोग मानते हैं कि ग़ज़ा सिटी पर कब्ज़े की योजना खतरनाक है। इससे बंधकों की जान को खतरा है और थकी हुई इसराइली सेना दलदल में फंस सकती है।
ग़ज़ा में मानवीय संकट
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ ग़ज़ा की 90% आबादी यानी 19 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पांच लाख से ज़्यादा लोग अकाल, भुखमरी और मौत के मुहाने पर हैं। राहत एजेंसियों का आरोप है कि इस स्थिति के लिए इसराइल ज़िम्मेदार है, क्योंकि उसने ग़ज़ा में खाने-पीने और दूसरी राहत सामग्री के जाने पर रोक लगाई है। हालांकि इसराइल ने इस रिपोर्ट को झूठा बताया है।
युद्ध का बैकग्राउंड
7 अक्तूबर 2023 को हमास ने इसराइल पर हमला किया था, जिसमें 1,200 लोगों की मौत हुई और 251 को बंधक बनाया गया। उसके बाद से अब तक इसराइल की जवाबी कार्रवाई में ग़ज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ 62,686 से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र भी इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानता है।
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