गाजा पट्टी में जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। इजरायल ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक (West Bank) इलाके में 19 नई यहूदी बस्तियों को आधिकारिक मान्यता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस कदम को फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने से रोकने की इजरायल की सबसे बड़ी चाल के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले की तीखी आलोचना हो रही है, लेकिन इजरायल सरकार अपनी ‘सेटलमेंट विस्तार’ की नीति पर अडिग नजर आ रही है।
“दो-राष्ट्र समाधान” को दफन करने की तैयारी!
इस विवादास्पद योजना के पीछे इजरायल के कट्टर दक्षिणपंथी वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ का हाथ है। स्मोट्रिच ने इस फैसले के पीछे का मकसद छिपाने की कोशिश भी नहीं की। उन्होंने खुलेआम कहा कि यह कदम “फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को रोकने” के लिए उठाया गया है। उनका मानना है कि इन बस्तियों के विस्तार से “टू-स्टेट सॉल्यूशन” (दो-देश समाधान) की संभावना हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को अवैध माना जाता है। इसके बावजूद नेतन्याहू प्रशासन न केवल नई बस्तियां बसा रहा है, बल्कि पहले से मौजूद अवैध आउटपोस्ट्स को भी कानूनी दर्जा दे रहा है।
सऊदी अरब और UN ने दी कड़ी चेतावनी
इजरायल के इस आक्रामक रुख पर दुनिया के बड़े देशों और संगठनों ने नाराजगी जताई है।
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संयुक्त राष्ट्र (UN): महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि इजरायल का यह व्यवहार क्षेत्र में तनाव को बढ़ा रहा है। इससे फिलिस्तीनियों की अपनी ही जमीन तक पहुंच खत्म हो रही है और भविष्य में एक संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य का सपना टूट रहा है।
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सऊदी अरब: सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इन उल्लंघनों को रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएं
क्या है “टू-स्टेट सॉल्यूशन” और क्यों है खतरा?
दशकों से चल रहे इस विवाद का हल ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ में देखा जाता रहा है। इसका सीधा मतलब है कि वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी को मिलाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश बने, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो। यह समाधान 1967 के युद्ध से पहले की सीमाओं पर आधारित है। लेकिन इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक में लगातार बस्तियां बसाने से जमीन का नक्शा बदल रहा है, जिससे फिलिस्तीन के लिए जगह ही नहीं बच रही है।
तीन साल में 69 बस्तियां: रुकने का नाम नहीं ले रहा इजरायल
इजरायली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में कुल 69 बस्तियों को मंजूरी दी गई है। ताजा फैसले में ‘गनीम’ और ‘कदीम’ नाम की उन दो बस्तियों को दोबारा बसाने की अनुमति दी गई है, जिन्हें 20 साल पहले अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण हटाया गया था।
इससे पहले मई में इजरायल ने 22 नई बस्तियों को मंजूरी दी थी, जिसे दशकों का सबसे बड़ा विस्तार माना गया था। आंकड़ों की बात करें तो पूर्वी यरुशलम को छोड़कर वेस्ट बैंक में फिलहाल 5 लाख से ज्यादा इजरायली रहते हैं, जबकि उसी इलाके में करीब 30 लाख फिलिस्तीनी अपनी पहचान बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से वेस्ट बैंक में हिंसा और कब्जे की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है, जो मध्य पूर्व की शांति के लिए एक बड़ा खतरा है।
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