‘इरफान का शरीर सिकुड़ रहा था, कपड़ों में लगानी पड़ती थी पैडिंग’, अंग्रेजी मीडियम की डिजाइनर का रुला देने वाला खुलासा!

irrfan-khan-angrezi-medium-shooting-struggle-last-days-revelation

बॉलीवुड के सबसे मंझे हुए और दिग्गज कलाकारों में शुमार इरफान खान भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनकी फिल्में आज भी फैंस की आंखों को नम कर देती हैं। साल 2020 में जब इरफान ने दुनिया को अलविदा कहा, तो सिनेमा जगत में एक ऐसा खालीपन आ गया जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। अब उनकी आखिरी फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ की कॉस्ट्यूम डिजाइनर स्मृति चौहान ने एक्टर के आखिरी दिनों को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्हें सुनकर आप भी भावुक हो जाएंगे।

जब दर्द से कराह रहे थे ‘मैस्ट्रो’ इरफान

स्मृति चौहान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ की शूटिंग के दौरान इरफान खान की हालत कितनी गंभीर थी। 2018 में न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर जैसी दुर्लभ बीमारी का पता चलने के बाद इरफान का विदेश में लंबा इलाज चला था। वे काम पर तो लौटे, लेकिन कैंसर ने उनके शरीर को अंदर से खोखला कर दिया था। स्मृति के मुताबिक, सेट पर इरफान अक्सर असहनीय दर्द में रहते थे।

‘स्मृति, मुझे बहुत ठंड लगती है…’

इरफान खान की हिम्मत की दाद देनी होगी कि इतने बड़े संकट में भी उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा। स्मृति ने ‘डिजिटल कमेंट्री’ को बताया, “शूटिंग के दौरान उन्होंने मुझसे सिर्फ एक बात कही थी— स्मृति, मुझे बहुत ठंड लगती है।” इरफान ने डिजाइनर को लंदन के एक खास ब्रांड के बारे में बताया और वहां से गर्म कपड़े मंगवाने का अनुरोध किया। बीमारी की वजह से उन्हें सामान्य तापमान में भी ठिठुरन महसूस होती थी।

वजन इतना घटा कि कपड़ों में करनी पड़ी ‘पैडिंग’

डिजाइनर ने जो सबसे चौंकाने वाली बात बताई, वह इरफान के शारीरिक बदलाव को लेकर थी। उन्होंने खुलासा किया कि कैंसर की वजह से इरफान का वजन बहुत तेजी से गिर रहा था और उनका शरीर सिकुड़ता जा रहा था।

स्मृति ने बताया, “हमें उनके कपड़ों में बहुत ज्यादा पैडिंग (Padding) लगानी पड़ती थी ताकि वे पर्दे पर सामान्य दिख सकें। फिल्म में गर्मी के सीन्स के लिए हमने उन्हें जो बनियान दी थी, उसमें भी पैडिंग लगानी पड़ी क्योंकि वे बहुत कमजोर हो गए थे।” कई बार तो कई परतों वाले कपड़े पहनाने के बाद भी उनकी बीमारी साफ झलकती थी।

मकसद के लिए आखिरी सांस तक लड़े

फिल्म की शूटिंग के दौरान कई बार हालात इतने खराब हो जाते थे कि इरफान सेट पर आने की स्थिति में भी नहीं होते थे। स्मृति बताती हैं, “कई दिन ऐसे थे जब शूटिंग कैंसिल करनी पड़ी क्योंकि कोशिश के बावजूद इरफान दर्द बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। लेकिन उन्हें अपनी कला पर अटूट विश्वास था। मुझे लगता है कि उन्हें पता था कि उनका मकसद यही है और वे शायद काम करते हुए ही इस दुनिया से जाना चाहते थे।”

इरफान की यह आखिरी फिल्म उनके निधन से महज कुछ दिन पहले ही रिलीज हुई थी। आज जब हम पर्दे पर उन्हें मुस्कुराते हुए देखते हैं, तो यह सोचना भी मुश्किल होता है कि उस मुस्कान के पीछे कितना दर्द छुपा था।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

    View all posts
Exit mobile version