तेहरान: ईरान से रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ दिनों से सुलग रहा ईरान अब हिंसा की उस आग में झुलस रहा है, जहां अपनों का ही खून बह रहा है। ‘ईरान इंटरनेशनल’ की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाने का आदेश खुद दिया था। इस आदेश के बाद ईरान की सड़कों पर जो मंजर दिखा, वो किसी डरावने सपने से कम नहीं है।
खामेनेई का ‘डेथ वारंट’ और सड़कों पर बिछी लाशें
रिपोर्ट के मुताबिक, यह खूनी खेल किसी गलती का नतीजा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और राष्ट्रपति कार्यालय से लीक हुई जानकारी के अनुसार, खामेनेई ने व्यक्तिगत रूप से सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों को खत्म करने का हुक्म दिया था।
हैरानी की बात यह है कि सरकार की तीनों शाखाओं के प्रमुखों को इस कत्लेआम की न सिर्फ पूरी जानकारी थी, बल्कि उनकी मौन स्वीकृति भी शामिल थी। सुरक्षा परिषद ने औपचारिक रूप से एक आदेश जारी किया, जिसके बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और बासिज मिलिशिया (Basij Militia) के लड़ाकों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
पहली बार सरकार ने कबूली मौतों की बात
ईरान सरकार, जो अब तक इन मौतों पर चुप्पी साधे हुए थी, उसने पहली बार सच्चाई स्वीकार की है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर माना है कि इस देशव्यापी हिंसा में अब तक 2000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन ने यह भी कहा कि मरने वालों में सुरक्षाकर्मियों की भी बड़ी तादाद है।
हालांकि, चालाकी दिखाते हुए सरकार ने यह साफ नहीं किया कि इन 2000 मौतों में आम नागरिक कितने हैं और जवान कितने? विशेषज्ञों का मानना है कि असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, क्योंकि कई शवों को परिवार वालों को सौंपने के बजाय गुप्त रूप से दफनाने की खबरें भी आ रही हैं।
भूख और गरीबी ने भड़काई विद्रोह की आग
यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ राजनीतिक नहीं है। इसकी जड़ें ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था में छिपी हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। देखते ही देखते यह चिंगारी ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल गई है।
अस्पतालों से आई गवाही, रूह कांप जाएगी
इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए मशहद, करमानशाह और इस्फ़हान जैसे बड़े शहरों से इनपुट जुटाए गए हैं। डॉक्टरों, नर्सों और चश्मदीदों ने बताया कि अस्पतालों में घायलों की भीड़ लगी है। सुरक्षा बलों ने न केवल सड़कों पर गोलियां चलाईं, बल्कि कई जगह अस्पतालों में घुसकर भी लोगों को निशाना बनाया गया।
अब आगे क्या? ईरान में जिस तरह के हालात हैं, उसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठनों ने खामेनेई के इस आदेश की कड़ी निंदा की है। सवाल यह है कि क्या अपनी ही जनता पर गोलियां चलवाकर खामेनेई अपनी सत्ता बचा पाएंगे? या फिर यह विद्रोह ईरान की सत्तापलट की कहानी लिखेगा? आने वाले दिन ईरान के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
