मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) की आग बुझने के बजाय और भड़कती जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है। पेजेश्कियन ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका देश इस समय अमेरिका, इजरायल और यूरोप के साथ ‘पूर्ण युद्ध’ (Full-Scale War) की स्थिति में है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद अहम मुलाकात होने वाली है।
“पश्चिम नहीं चाहता हम अपने पैरों पर खड़े हों”
ईरान के सर्वोच्च नेता की आधिकारिक वेबसाइट पर छपे एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पश्चिमी देशों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “पश्चिम और उसके सहयोगी नहीं चाहते कि इस्लामिक रिपब्लिक (ईरान) अपने पैरों पर खड़ा हो सके। वे हमें हर तरफ से घेरने की कोशिश कर रहे हैं।”
पेजेश्कियन ने इस मौजूदा स्थिति की तुलना 1980 के दशक में हुए ईरान-इराक युद्ध से की। उन्होंने कहा, “यह जंग उस आठ साल के खूनी संघर्ष से भी ज्यादा जटिल और खतरनाक है। तब स्थिति साफ थी, हमें पता था कि दुश्मन की मिसाइलें कहां से आ रही हैं। लेकिन आज, वे हमें सिर्फ सैन्य रूप से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के हर मोर्चे पर घेर रहे हैं।”
नेतन्याहू-ट्रंप की मुलाकात और ईरान पर ‘अटैक प्लान’
ईरानी राष्ट्रपति का यह तीखा बयान उस वक्त आया है जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार (स्थानीय समय) को फ्लोरिडा में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। खबरों की मानें तो इस मीटिंग में नेतन्याहू, ट्रंप के सामने ईरान पर हमला करने का एक विस्तृत प्लान पेश कर सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल चाहता है कि अमेरिका भी सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ इस जंग में शामिल हो जाए।
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रवक्ता शोश बेड्रोसियन ने संकेत दिए हैं कि इस मुलाकात में भविष्य के सैन्य कदमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली की योजनाओं पर चर्चा होगी।
“हम पहले से ज्यादा मजबूत, हमला हुआ तो मिलेगा कड़ा जवाब”
ईरान ने केवल अपनी चिंताएं ही जाहिर नहीं कीं, बल्कि इजरायल और अमेरिका को खुली चेतावनी भी दी है। पेजेश्कियन ने इंटरव्यू में जोर देकर कहा, “तमाम पाबंदियों और समस्याओं के बावजूद, आज ईरान हथियारों और सैन्य शक्ति के मामले में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ताकतवर है। अगर हमारे ऊपर हमला करने की जुर्रत की गई, तो उसका जवाब इतना कड़ा होगा कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।”
अमेरिका की क्या है रणनीति?
दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे अभी भी ईरान को इस क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाला सबसे बड़ा कारक मानते हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन की रणनीति फिलहाल सीधे सैन्य टकराव के बजाय ईरान पर ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) बनाने की दिख रही है। अमेरिका चाहता है कि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को अलग-थलग करके उसे कमजोर किया जाए।
अब दुनिया की निगाहें फ्लोरिडा में होने वाली नेतन्याहू और ट्रंप की मीटिंग पर टिकी हैं। क्या ट्रंप इजरायल के ‘अटैक प्लान’ को हरी झंडी देंगे या कूटनीति का रास्ता चुनेंगे? इस एक फैसले पर पूरे मिडिल ईस्ट का भविष्य टिका है।
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