नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के मुताबिक, 17 सितंबर 2025 का दिन बेहद खास रहने वाला है। इस दिन न केवल इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाएगा बल्कि ग्यारस श्राद्ध यानी एकादशी श्राद्ध भी इसी दिन पड़ रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि यह दुर्लभ संयोग पितरों की कृपा और भगवान विष्णु के आशीर्वाद दोनों पाने का अवसर देगा।a
इंदिरा एकादशी का महत्व
हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जो भी श्रद्धालु विधिपूर्वक व्रत रखते हैं, उन्हें न सिर्फ स्वास्थ्य लाभ मिलता है बल्कि उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
ग्यारस श्राद्ध का महत्व
17 सितंबर को ही ग्यारस श्राद्ध का भी आयोजन होगा। मान्यता है कि जिन लोगों की मृत्यु किसी भी महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन हुई हो, उनका पिंडदान और तर्पण इसी दिन किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए श्राद्ध से पितरों को शांति मिलती है और परिवार पर श्रीहरि की विशेष कृपा होती है।
इंदिरा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
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एकादशी तिथि की शुरुआत: 17 सितंबर, रात 12:21 बजे
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तिथि का समापन: 17 सितंबर, रात 11:39 बजे
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इस दिन परिघ योग, शिव योग और शिववास का संयोग भी बन रहा है, जिसके चलते पूरे दिन भगवान विष्णु की उपासना शुभ मानी जाएगी।
व्रत पारण का समय
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इंदिरा एकादशी का पारण: 18 सितंबर सुबह 6:07 बजे से 8:34 बजे तक
एकादशी श्राद्ध पर पितरों के तर्पण के मुहूर्त
ग्यारस श्राद्ध पर पितरों का तर्पण तीन विशेष मुहूर्तों में किया जाएगा:
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कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:40 बजे तक
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रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:40 से 1:29 बजे तक
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अपराह्न काल: दोपहर 1:29 से 3:56 बजे तक
इंदिरा एकादशी व्रत एवं पूजन विधि
इस दिन सुबह स्नान करके सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें। उसके बाद भगवान विष्णु की शालिग्राम रूप में पूजा करें।
पूजा सामग्री में शामिल करें:
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पीले फूल
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फल
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पंचामृत
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तुलसी दल
पूजन के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। व्रत करने वाले को दिनभर सात्त्विक आचरण करना चाहिए और संध्या समय भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए।
क्यों है यह संयोग खास?
2025 में इंदिरा एकादशी और ग्यारस श्राद्ध का एक ही दिन होना बहुत दुर्लभ संयोग है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और श्राद्ध दोनों करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है और घर-परिवार में शांति और समृद्धि आती है।
