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ईरान में फंसे 4000 भारतीय छात्र ,क्यों जाते हैं वहां पढ़ने?

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ईरान में फंसे 4000 भारतीय छात्र ,क्यों जाते हैं वहां पढ़ने?
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ईरान की धरती पर फंसे सपने

“जब मेरी बेटी ईरान पढ़ने जा रही थी, तो हम बहुत खुश थे कि वह अपना सपना पूरा करने जा रही है। लेकिन अब उसकी सुरक्षा को लेकर हम सभी परेशान हैं।” कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के एक शिक्षक अशरफ़ भट्ट की आँखों में चिंता साफ़ झलकती है।

उनकी बेटी रौनक़ अशरफ़ सिर्फ़ तीन महीने पहले ही तेहरान स्थित ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गई थीं। अब वह उन लगभग 4,000 भारतीय छात्रों में शामिल हैं, जो ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच वहां फंसे हुए हैं।

हवाई मार्ग बंद, परिवारों की बेचैनी

“फिलहाल हम लोग क़ुम शहर के एक होटल में रुके हुए हैं। क़रीब एक हज़ार छात्र-छात्राएं यहां मौजूद हैं। इनमें से 180 छात्र मेरी ही यूनिवर्सिटी के हैं,” रौनक़ ने फ़ोन पर बताया। उन्होंने बताया कि “जिस टीवी स्टेशन पर हमला हुआ था, वह हमारी यूनिवर्सिटी से सिर्फ़ दो मिनट की दूरी पर है।”

हवाई मार्ग बंद होने के कारण भारतीय छात्रों का वतन लौटना फ़िलहाल मुश्किल हो गया है। कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक के परिवार अपने बच्चों की सलामती के लिए दुआएं कर रहे हैं। रविवार को श्रीनगर में कई अभिभावकों ने प्रदर्शन कर अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी की मांग की।

ईरान में पढ़ाई का आकर्षण: कम लागत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

भारत के हजारों छात्र हर साल ईरान का रुख क्यों करते हैं? इसके पीछे कई कारण हैं।

“ईरान में छह साल की एमबीबीएस की कुल फ़ीस लगभग 15 से 30 लाख रुपये है, जबकि बांग्लादेश में यह फ़ीस दोगुनी यानी लगभग 60 लाख रुपये तक होती है,” अशरफ़ भट्ट ने बताया। यूक्रेन जैसे देशों में हालात बिगड़ने के बाद ईरान मेडिकल पढ़ाई का एक वैकल्पिक और किफायती गंतव्य बन गया है।

इसके अलावा, ईरान का रहन-सहन और मौसम कश्मीरी छात्रों के लिए अपने घर जैसा लगता है, जो उन्हें वहां अधिक सहज महसूस कराता है।

सिर्फ़ मेडिकल ही नहीं, धार्मिक शिक्षा भी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले मोहम्मद फ़रज़ान रिज़वी ईरान के क़ुम शहर में धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले मोहम्मद फ़रज़ान रिज़वी ईरान के क़ुम शहर में धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं. ( Image Source : BBC )

मेडिकल के अतिरिक्त, ईरान के क़ुम और मशहद शहर धार्मिक शिक्षा के प्रमुख केंद्र हैं। इराक़ के नजफ़ के बाद क़ुम शिया धार्मिक शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।

“क़ुम शहर में हालात सामान्य हैं। यहां सिर्फ हवाई मार्ग बंद है, लेकिन स्कूल, बाज़ार सब कुछ सामान्य रूप से चल रहे हैं। फ़िलहाल यहां कोई ख़तरा नज़र नहीं आता,” उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले मोहम्मद फ़रज़ान रिज़वी ने बताया, जो पिछले नौ वर्षों से क़ुम में धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

ईरान में धार्मिक शिक्षा लेने वाले छात्रों के लिए एक बड़ा आकर्षण यह भी है कि उनकी पूरी पढ़ाई का ख़र्च ईरानी सरकार वहन करती है।

सरकार की कार्रवाई और छात्रों की सुरक्षा

भारत सरकार ने मंगलवार को ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए एक हेल्प सेंटर शुरू किया है। विदेश मंत्रालय ने सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे अपने स्तर पर तेहरान से निकलकर किसी सुरक्षित जगह पहुंच जाएं।

“तेहरान में भारतीय दूतावास हालात पर नज़र बनाए हुए है। भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार चिंतित है। कुछ छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है,” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया।

सरकार द्वारा कुछ छात्रों को आर्मीनिया भी पहुंचाया गया है। लेकिन अभी भी हज़ारों छात्र ऐसे हैं, जिनकी वापसी का इंतज़ार है।

आगे क्या होगा?

ईरान और इज़राइल के बीच तनाव कितना बढ़ेगा, यह अभी अनिश्चित है। लेकिन भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की स्थिति से बचा जा सकता है।

“हम चाहते हैं कि सरकार हमारे बच्चों को जल्द से जल्द वापस लाए,” कुपवाड़ा के ग़ुलाम मुहिद्दीन सरकारी कहते हैं, जिनकी बेटी नूर मुंतहा शीराज़ मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के दूसरे वर्ष की छात्रा हैं।

ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे तेहरान छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाएं और अपनी लोकेशन एवं संपर्क विवरण दूतावास को भेजें।

हालांकि संकट की इस घड़ी में, भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, फिर भी यह देखना बाकी है कि हज़ारों छात्रों को सुरक्षित स्वदेश कैसे लाया जाएगा।

लेखक

  • Nalini Mishra

    नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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नलिनी मिश्रा

नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञतानलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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