अमेरिका से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। पेनसिल्वेनिया में रहने वाले भारतीय मूल के दो सगे भाइयों को अमेरिकी अदालत ने धोखाधड़ी और कई बड़े घोटालों के आरोप में कुल 835 साल की लंबी जेल की सजा सुनाई है। यह मामला न केवल पैसों की हेराफेरी से जुड़ा है, बल्कि इसमें रसूख और फर्जीवाड़े का एक ऐसा जाल बुना गया था, जिसे देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए।
कौन हैं ये भाई और क्या है पूरा मामला?
ये दोनों भाई, भास्कर सवानी (60 वर्ष) और अरुण सवानी (58 वर्ष), अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में ‘सवानी ग्रुप’ के नाम से एक बड़ा नेटवर्क चलाते थे। भास्कर पेशे से एक डेंटिस्ट (दंत चिकित्सक) हैं। इन दोनों भाइयों पर आरोप था कि इन्होंने अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली (Medicaid) और एच-1बी (H-1B) वीजा प्रोग्राम का गलत फायदा उठाकर करोड़ों डॉलर की ठगी की है।
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अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के अनुसार, सवानी भाइयों ने करीब एक दशक तक कंपनियों और डेंटल क्लीनिकों का एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया, जिसका इस्तेमाल वे मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और स्वास्थ्य सेवा में धोखाधड़ी के लिए करते थे। जांच में सामने आया कि उन्होंने अमेरिकी सरकार के मेडिकेड प्रोग्राम को करीब 30 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) का चूना लगाया है।
मेडिकेड में कैसे की धोखाधड़ी?
मेडिकेड अमेरिका का एक सरकारी प्रोग्राम है, जो कम आय वाले लोगों और बच्चों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करता है। सवानी भाइयों ने अपने डेंटल क्लीनिकों के जरिए फर्जी बिलिंग की। वे उन डॉक्टरों के नाम पर भी पैसे वसूल रहे थे जो वहां काम ही नहीं करते थे। हद तो तब हो गई जब उन्होंने ऐसे डेंटिस्टों की आईडी का इस्तेमाल किया जो उस समय विदेश यात्रा पर थे। साथ ही, उन्होंने ऐसे लोगों को इलाज के लिए रखा जिनके पास जरूरी योग्यता (Credentials) तक नहीं थी।
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इतना ही नहीं, कोर्ट में यह भी बताया गया कि इन्होंने मरीजों के दांतों में ऐसे डेंटल इंप्लांट्स लगाए जिन पर साफ लिखा था “इंसानों के इस्तेमाल के लिए नहीं” (Not For Human Use)। ये उपकरण एफडीए (FDA) द्वारा पास नहीं थे, फिर भी मरीजों की जानकारी के बिना उन्हें लगाया गया।
एच-1बी वीजा और कर्मचारियों के साथ ठगी
सवानी भाइयों का जाल सिर्फ स्वास्थ्य सेवा तक सीमित नहीं था। उन्होंने भारत से लोगों को काम पर बुलाने के लिए एच-1बी वीजा का भी गलत इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, वे कर्मचारियों को अमेरिका बुलाते थे, लेकिन वहां उनसे उनकी सैलरी का एक हिस्सा ‘किकबैक’ के रूप में वापस ले लेते थे। यानी कर्मचारियों को अपनी ही मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा भाइयों को वापस देना पड़ता था।
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रसूख दिखाने के लिए काश पटेल के साथ खिंचवाई फोटो
जांच के दौरान एक दिलचस्प बात यह सामने आई कि ये दोनों भाई समाज में अपना दबदबा दिखाने के लिए बड़े नेताओं और अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवाते थे। सोशल मीडिया पर उनकी एफबीआई (FBI) चीफ काश पटेल के साथ तस्वीरें वायरल हुई थीं। अभियोजकों का कहना है कि इन तस्वीरों के जरिए वे खुद को प्रभावशाली दिखाते थे ताकि लोग उन पर शक न करें और उनका अवैध कारोबार फलता-फूलता रहे।
अदालत का कड़ा रुख और सजा का ऐलान
अमेरिकी अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर माना। कोर्ट ने भास्कर सवानी को 420 साल और अरुण सवानी को 415 साल की जेल की सजा सुनाई। दोनों की सजा मिलाकर कुल 835 साल होती है। इसके अलावा, उनके कुछ साथियों जैसे एलेक्जेंड्रा ओला राडोमिक और अन्य को भी इस साजिश में शामिल होने के लिए दोषी करार दिया गया है।
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जांच अधिकारियों ने बताया कि ठगी के पैसों का इस्तेमाल भाइयों ने अपने निजी खर्चों, जैसे बच्चों की कॉलेज फीस, घर का टैक्स और मेंटेनेंस भरने के लिए किया। उन्होंने इस पैसे को छुपाने के लिए कई शेल कंपनियां (फर्जी कंपनियां) भी बनाई थीं।
यह सजा उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो कानून की कमियों का फायदा उठाकर सरकारी धन और आम लोगों के भरोसे के साथ खिलवाड़ करते हैं। सवानी भाइयों का यह साम्राज्य अब पूरी तरह ढह चुका है और उन्हें अपनी बाकी जिंदगी सलाखों के पीछे ही गुजारनी होगी।
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