अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय मूल के डॉक्टर नील आनंद को हेल्थ इंश्योरेंस फ्रॉड (Health Insurance Fraud) के मामले में 14 साल की सजा सुनाई है। पेनसिल्वेनिया के रहने वाले 48 वर्षीय इस डॉक्टर ने अनावश्यक दवाएं और “गुडी बैग्स” देकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये हड़पे। अदालत ने न केवल उन्हें जेल भेजा, बल्कि धोखाधड़ी से कमाए 2 मिलियन डॉलर से अधिक (करीब 17 करोड़ रुपये) भी जब्त करने का आदेश दिया।
कैसे हुआ 20 करोड़ का बीमा घोटाला?
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, डॉ. आनंद ने मेडिकेयर, यूएस ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट (OPM), इंडिपेंडेंस ब्लू क्रॉस (IBC) और एंथम जैसी बीमा योजनाओं में फर्जी और धोखाधड़ी वाले क्लेम फाइल किए।
उन्होंने अपनी इन-हाउस फार्मेसियों के जरिए मरीजों को दवाओं से भरे बैग दिए, जिनमें कई बार ऑक्सीकोडोन (Oxycodone) जैसी नशीली और खतरनाक दवाएं भी शामिल थीं। अदालत में पेश सबूतों से सामने आया कि आनंद ने सिर्फ 9 मरीजों के लिए ही 20,850 ऑक्सीकोडोन टैबलेट्स निर्धारित किए थे, जबकि इसकी मेडिकल जरूरत बिल्कुल नहीं थी।
बिना लाइसेंस वाले इंटर्न्स से लिखवाए प्रिस्क्रिप्शन
डॉ. नील आनंद पर आरोप है कि उन्होंने बिना लाइसेंस वाले मेडिकल इंटर्न्स को प्री-साइन किए गए प्रिस्क्रिप्शन पैड दिए। इन इंटर्न्स ने नियंत्रित दवाओं के लिए मरीजों को पर्चे लिखे, जो पूरी तरह गैरकानूनी था। इस पूरे खेल में बीमा कंपनियों से उन्होंने 2.4 मिलियन डॉलर (करीब 20 करोड़ रुपये) की रकम वसूली।
पैसे रिश्तेदार के खाते में किए ट्रांसफर
जांच से बचने के लिए आनंद ने धोखाधड़ी से कमाए 1.2 मिलियन डॉलर (करीब 10 करोड़ रुपये) एक रिश्तेदार के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए। अदालत ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग की चाल करार दिया।
9/11 पीड़ितों और US Navy सेवा की दलील
सजा के दौरान डॉ. आनंद ने दावा किया कि उन्होंने 9/11 हमलों के पीड़ितों का इलाज किया था और वह अमेरिकी नौसेना में चिकित्सक भी रह चुके हैं। उनका कहना था कि उन्हें मरीजों की मदद के लिए दवा देने पर अपराधी बनाया जा रहा है।
लेकिन अदालत ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया। जज चाड एफ. केनी ने कहा,
“आपके लिए मरीजों का दर्द सिर्फ मुनाफा था। आपका ध्यान इलाज पर नहीं, बल्कि अवैध लाभ कमाने पर था।”
डॉक्टर आनंद का बचाव
आनंद और उनके परिवार ने आरोपों को झूठा बताया। उनका कहना है कि सरकार ने AI और हेरफेर किए गए डेटा का इस्तेमाल करके उन्हें फंसाया है। अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा,
“कानून ने अभी के लिए फैसला सुना दिया है, लेकिन सवाल बाकी हैं: उपचार क्या है? न्याय क्या है? दया और दुराचार के बीच की रेखा कहां है?”
सोशल मीडिया पर भी कुछ समूह उनके समर्थन में सामने आए और दावा किया कि वह सरकारी साजिश का शिकार हुए हैं।
अदालत का अंतिम फैसला
हालांकि, अदालत ने साफ कहा कि डॉ. आनंद की हरकतें लालच और अवैध मुनाफे से प्रेरित थीं। इसी वजह से उन्हें 14 साल की जेल, 2 मिलियन डॉलर की क्षतिपूर्ति और उतनी ही रकम जब्ती की सजा सुनाई गई।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मेडिकल प्रोफेशन में मरीजों की सुरक्षा और दवा का सही इस्तेमाल अब भी प्राथमिकता है या कहीं मुनाफा हावी हो गया है?
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