भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। डिजाइनिंग, फैब (निर्माण) और पैकेजिंग—तीनों मोर्चों पर एक साथ विकास हो रहा है। अमेरिकी और ताइवानी कंपनियां भारतीय इंजीनियरों पर भरोसा जता रही हैं, जबकि चिप निर्माण में लगने वाली मशीनों, गैसों और केमिकल्स की फैक्ट्रियां भी देश में स्थापित हो रही हैं।
भारतीय टैलेंट पर दुनिया की नज़र
अभी तक भारतीय युवाओं की पहचान कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में रही है, पर आने वाले वर्षों में यही युवा सेमीकंडक्टर इंजीनियर के रूप में भी वैश्विक पहचान बनाएंगे। सबसे बड़ी वजह—भारत में डिजाइनिंग, फैब और पैकेजिंग का समांतर विस्तार, जिससे इंडस्ट्री को कुशल टैलेंट की बड़ी फौज मिल रही है।
Micron देगी अवसर, स्टॉल पर करें अप्लाई
अमेरिकी कंपनी Micron ने Semicon India 2025 में भारतीय युवाओं को नौकरी देने की पेशकश की है। कंपनी के स्टॉल पर आने वाले उम्मीदवार सीधे आवेदन कर सकते हैं। Micron का कहना है कि रिसर्च से लेकर हर फंक्शन में युवाओं की जरूरत है, इसलिए वे सक्रिय रूप से अप्लाई करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
“भारत इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति के मुहाने पर”
ताइवान की Delta Electronics India के प्रेसिडेंट बेंजामिन लिन ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति के मुहाने पर खड़ा है। भारतीय युवाओं की क्षमता पर उन्हें पूरा भरोसा है। इसी भरोसे के साथ चिप निर्माण में आवश्यक मशीनों, गैसों और केमिकल्स की फैक्ट्रियां भी देश में लग रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, चिप निर्माण में 500 केमिकल और 50 तरह की गैसों का उपयोग होता है—और इन सभी के उत्पादन के लिए भारत में यूनिट्स स्थापित की जा रही हैं।
भारत की हिस्सेदारी और नौकरियां बढ़ेंगी
आगे चलकर चिप निर्माण से जुड़ी मशीनें भी भारत में बनेंगी। पूरा इकोसिस्टम तैयार होने से हजारों नौकरियों के अवसर पैदा होंगे और दुनिया को कुशल श्रमिकों की सप्लाई भारत से होगी।
20% ग्लोबल चिप डिज़ाइन भारत में
चिप डिजाइनिंग कंपनी MediaTek India के एमडी Anku Jain के अनुसार, दुनिया में बनने वाली करीब 20% चिप्स की डिजाइनिंग भारत में होती है। जैसे-जैसे फैब और पैकेजिंग में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी, वैसे-वैसे हजारों टेक्नोलॉजी छात्रों की जरूरत पड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह चुके हैं कि चिप टेक्नोलॉजी दुनिया की प्रगति को गति देने की ताकत रखती है—और इसे संभव बनाने वाले युवा हर देश में मांग में रहेंगे।
200+ कॉलेज तैयार कर रहे ‘सेमीकंडक्टर फोर्स’
देश के 200 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस क्षेत्र के लिए युवा फोर्स तैयार की जा रही है। इस साल के अंत से कमर्शियल स्तर पर चिप उत्पादन शुरू होते ही कुशल भारतीय वर्कफोर्स की मांग तेज़ी से बढ़ेगी। भारत में इंजीनियरिंग, साइंस और गणित में हर साल 25 लाख से अधिक युवा ग्रेजुएट होते हैं—जो दुनिया में सबसे बड़े टैलेंट पूल में से एक है।
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