भारत की अर्थव्यवस्था के लिए आने वाला साल 2026 किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है। एक्सपर्ट्स और सरकारी आंकड़ों की मानें तो भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में दुनिया के सभी बड़े देशों को पीछे छोड़ने की तैयारी में है। मजबूत मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल्स, अरबों डॉलर के निवेश के वादे और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार ने भारत को ग्लोबल इन्वेस्टर्स की पहली पसंद बना दिया है।
सरकार भारत को दुनिया का सबसे भरोसेमंद निवेश केंद्र बनाने के लिए लगातार अपनी नीतियों में बदलाव कर रही है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने निवेशकों की राह आसान करने के लिए कई राउंड की बैठकें की हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल खुद कमान संभाल रहे हैं ताकि निवेश की प्रक्रियाओं को तेज और सरल बनाया जा सके।
क्यों बढ़ रहा है निवेशकों का भरोसा?
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत अपनी मजबूत नीतियों के दम पर टिका हुआ है। विदेशी निवेशकों को भारत में न केवल बेहतर रिटर्न मिल रहा है, बल्कि यहां का कुशल वर्कफोर्स और छोटे अपराधों का अपराधीकरण खत्म होना भी उन्हें आकर्षित कर रहा है।
टूटेगा 80 अरब डॉलर का रिकॉर्ड!
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने पहले ही 80.5 अरब डॉलर (करीब 6.7 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम FDI हासिल कर इतिहास रच दिया है। DPIIT सचिव अमरदीप सिंह भाटिया के अनुसार, पिछले 11 सालों के सुधारों का नतीजा अब दिखने लगा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 में निवेश का यह आंकड़ा 100 अरब डॉलर के स्तर को भी छू सकता है।
EFTA समझौता: गेम चेंजर साबित होगी 100 अरब डॉलर की डील
भारत ने हाल ही में यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इसमें स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन जैसे देश शामिल हैं। इस समझौते के तहत अगले 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया गया है।
इसकी झलक तब दिखी जब 1 अक्टूबर 2025 को समझौता लागू होते ही स्विस कंपनी रोश फार्मा ने भारत में 17,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान कर दिया। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के साथ होने वाले व्यापार समझौते से भी 2026 में बड़े निवेश की उम्मीद है।
टेक और मैन्युफैक्चरिंग: दिग्गज कंपनियों ने खोले खजाने
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां भारत को अपना नया बेस बना रही हैं:
माइक्रोसॉफ्ट: 2030 तक 17.5 अरब डॉलर का निवेश।
एमेजॉन: अगले 5 साल में 35 अरब डॉलर का बड़ा दांव।
गूगल: 15 अरब डॉलर के निवेश से बनेगा एआई (AI) हब।
Apple और Samsung: आईफोन और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मैन्युफैक्चरिंग को भारत में और तेज करेंगे।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
डेलॉइट इंडिया की इकोनॉमिस्ट रुमकी मजूमदार का मानना है कि भारत जिस तरह से अपने आर्थिक रिश्तों को डायवर्सिफाई कर रहा है, उससे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में लंबे समय तक पैसा आएगा। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों (GCC) से आने वाला निवेश भारत के लिए एक नया और मजबूत पिलर बन रहा है।
किन सेक्टरों में आ रहा है सबसे ज्यादा पैसा?
वर्तमान में भारत में सबसे ज्यादा निवेश मॉरीशस और सिंगापुर के जरिए आता है (लगभग 49%)। इसके बाद अमेरिका, नीदरलैंड्स और जापान का नंबर है। सेक्टर की बात करें तो सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, टेलीकॉम, ऑटोमोबाइल और फार्मा में सबसे ज्यादा विदेशी पैसा लग रहा है।
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