1 जनवरी से भारत की गोद में जा बैठेंगे रूस-चीन! डॉलर और तेल के खेल में मचेगी खलबली, क्या खत्म होगी अमेरिका की बादशाहत?

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साल 2026 की शुरुआत दुनिया की राजनीति में एक बड़ा भूचाल लेकर आने वाली है। 1 जनवरी, 2026 से भारत आधिकारिक तौर पर ‘ब्रिक्स’ (BRICS) समूह की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका की सख्त नीतियों ने अनजाने में ही भारत, चीन और रूस को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है। जानकारों का मानना है कि भारत के नेतृत्व में यह संगठन अब इतना ताकतवर हो चुका है कि वाशिंगटन की नींद उड़नी तय है।

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वाली धमकियों और अमेरिकी डॉलर के दबाव के बीच, ब्रिक्स देश अब एक ऐसी नई विश्व व्यवस्था (New World Order) की नींव रख रहे हैं, जहां अमेरिका का ‘हुक्म’ नहीं चलेगा।

तेल और सोने का ‘सुपरपावर’ है ब्रिक्स

दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए सबसे जरूरी दो चीजें हैं—तेल और सोना। ब्रिक्स देशों ने इन दोनों ही मोर्चों पर अमेरिका को पछाड़ने की तैयारी कर ली है।

डॉलर की ‘बैंड’ बजाने की तैयारी: रुपये में होगा व्यापार!

सबसे बड़ा हमला अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत यानी ‘डॉलर’ पर होने जा रहा है। भारत ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ब्रिक्स देशों के साथ 100% व्यापार भारतीय रुपये में करने की मंजूरी दे दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को बिना पूर्व अनुमति के ‘वोस्त्रो खाते’ (Vostro Accounts) खोलने की छूट दे दी है। इसका मतलब है कि अब रूस या ब्राजील से सामान खरीदते समय डॉलर की जरूरत नहीं होगी, भुगतान सीधे रुपये में होगा।

इसके साथ ही, ब्रिक्स देश अपनी खुद की वैकल्पिक भुगतान प्रणाली (Alternative Payment System) बना रहे हैं। रूस में ब्राजील के राजदूत सर्जियो रोड्रिग्स ने इसे ‘सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्राथमिकता’ बताया है।

ट्रंप के प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल की ‘नदियां’

भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हों, लेकिन भारत पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है। भारतीय रिफाइनरियां धड़ल्ले से रूस से कच्चा तेल खरीद रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक:

कृषि और GDP में ब्रिक्स का दबदबा

सिर्फ तेल ही नहीं, ब्रिक्स देश अब खेती और खाद्य सुरक्षा (Food Security) को लेकर भी एकजुट हो रहे हैं। तकनीक के लेन-देन और जलवायु अनुकूल खेती पर एक साझा रणनीति बनाई जा रही है। अगर अर्थव्यवस्था की बात करें, तो 2024 में वैश्विक जीडीपी (World GDP) में ब्रिक्स का योगदान 29 प्रतिशत रहा है। चीन, भारत, ब्राजील और रूस दुनिया की 11 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं।

1 जनवरी से भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का यह नया अवतार अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। क्या 2026 अमेरिकी वर्चस्व के अंत की शुरुआत होगा? यह तो वक्त ही बताएगा।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

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