साल 2026 की शुरुआत दुनिया की राजनीति में एक बड़ा भूचाल लेकर आने वाली है। 1 जनवरी, 2026 से भारत आधिकारिक तौर पर ‘ब्रिक्स’ (BRICS) समूह की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका की सख्त नीतियों ने अनजाने में ही भारत, चीन और रूस को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है। जानकारों का मानना है कि भारत के नेतृत्व में यह संगठन अब इतना ताकतवर हो चुका है कि वाशिंगटन की नींद उड़नी तय है।
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वाली धमकियों और अमेरिकी डॉलर के दबाव के बीच, ब्रिक्स देश अब एक ऐसी नई विश्व व्यवस्था (New World Order) की नींव रख रहे हैं, जहां अमेरिका का ‘हुक्म’ नहीं चलेगा।
तेल और सोने का ‘सुपरपावर’ है ब्रिक्स
दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए सबसे जरूरी दो चीजें हैं—तेल और सोना। ब्रिक्स देशों ने इन दोनों ही मोर्चों पर अमेरिका को पछाड़ने की तैयारी कर ली है।
-
तेल का खेल: विश्व ऊर्जा सांख्यिकी समीक्षा 2025 के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा अकेले ब्रिक्स देशों से आया है।
-
सोने का भंडार: डॉलर के मुकाबले अपनी करेंसी को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स देश तेजी से सोना जमा कर रहे हैं। रूस और चीन के पास दुनिया के कुल केंद्रीय बैंक भंडार का 14% सोना है, जबकि पूरे ब्रिक्स समूह के पास करीब 20% स्वर्ण भंडार मौजूद है।
डॉलर की ‘बैंड’ बजाने की तैयारी: रुपये में होगा व्यापार!
सबसे बड़ा हमला अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत यानी ‘डॉलर’ पर होने जा रहा है। भारत ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ब्रिक्स देशों के साथ 100% व्यापार भारतीय रुपये में करने की मंजूरी दे दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को बिना पूर्व अनुमति के ‘वोस्त्रो खाते’ (Vostro Accounts) खोलने की छूट दे दी है। इसका मतलब है कि अब रूस या ब्राजील से सामान खरीदते समय डॉलर की जरूरत नहीं होगी, भुगतान सीधे रुपये में होगा।
इसके साथ ही, ब्रिक्स देश अपनी खुद की वैकल्पिक भुगतान प्रणाली (Alternative Payment System) बना रहे हैं। रूस में ब्राजील के राजदूत सर्जियो रोड्रिग्स ने इसे ‘सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्राथमिकता’ बताया है।
ट्रंप के प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल की ‘नदियां’
भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हों, लेकिन भारत पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है। भारतीय रिफाइनरियां धड़ल्ले से रूस से कच्चा तेल खरीद रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
-
दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात 10 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक होने की उम्मीद है।
-
रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों ने भी रियायती दरों पर रूसी तेल की खरीदारी फिर से शुरू कर दी है।
-
नवंबर में भारत ने रूस से 1.77 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल मंगाया, जो पिछले महीनों की तुलना में ज्यादा है।
कृषि और GDP में ब्रिक्स का दबदबा
सिर्फ तेल ही नहीं, ब्रिक्स देश अब खेती और खाद्य सुरक्षा (Food Security) को लेकर भी एकजुट हो रहे हैं। तकनीक के लेन-देन और जलवायु अनुकूल खेती पर एक साझा रणनीति बनाई जा रही है। अगर अर्थव्यवस्था की बात करें, तो 2024 में वैश्विक जीडीपी (World GDP) में ब्रिक्स का योगदान 29 प्रतिशत रहा है। चीन, भारत, ब्राजील और रूस दुनिया की 11 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं।
1 जनवरी से भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का यह नया अवतार अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। क्या 2026 अमेरिकी वर्चस्व के अंत की शुरुआत होगा? यह तो वक्त ही बताएगा।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
