नई दिल्ली: भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए साल 2025 किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा। अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो यह साल भारतीय सड़कों और शोरूम्स के लिए उम्मीदों से भरा साबित हुआ। लेकिन अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि साल 2026 में क्या होने वाला है? क्या गाड़ियों की बिक्री का यह रिकॉर्ड टूटेगा या बाजार की रफ्तार थमेगी?
2025 में ‘GST के मास्टरस्ट्रोक’ ने बदली तस्वीर
साल 2025 में ऑटो सेक्टर की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ नरेंद्र मोदी सरकार के उस फैसले का था, जिसने त्योहारी सीजन से ठीक पहले गाड़ियों पर GST की दरों में बड़ी कटौती कर दी। इस एक फैसले ने बाजार में ऐसी हलचल मचाई कि लोग शोरूम्स की तरफ दौड़ पड़े।
आंकड़ों की बात करें तो नवंबर 2025 में, टैक्स कटौती के महज एक महीने बाद, वाहनों की कुल बिक्री में 20 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया। पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में 18.7% की ग्रोथ दर्ज की गई। नवंबर 2024 में जहां 3,47,522 गाड़ियां बिकी थीं, वहीं नवंबर 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 4,12,405 यूनिट्स तक पहुंच गया। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन चुका है और यह बढ़त उसी का नतीजा है।
टैक्स का नया गणित: किसे हुआ फायदा?
22 सितंबर 2025 को जब नया GST स्ट्रक्चर लागू हुआ, तो उसने पूरी इंडस्ट्री की सूरत बदल दी। पहले सभी कारों पर 28% GST और इंजन के साइज के हिसाब से 17% से 22% तक का सेस (Cess) लगता था। लेकिन नई नीति के तहत इसे दो हिस्सों में बांट दिया गया:
आम गाड़ियां: सिर्फ 18% GST।
लग्जरी गाड़ियां: 40% GST।
इस बदलाव का असर यह हुआ कि टैक्स लागू होने के पहले ही दिन टाटा मोटर्स ने 10,000, मारुति सुजुकी ने 30,000 और हुंडई ने 11,000 गाड़ियों की सेल रिपोर्ट की।
दिग्गजों की जंग: महिंद्रा और टाटा ने हुंडई को पछाड़ा
साल 2025 में भारतीय ऑटो जगत की रैंकिंग में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला। दशकों तक नंबर-2 की कुर्सी पर काबिज रहने वाली कोरियाई कंपनी हुंडई (Hyundai) अब खिसक कर चौथे स्थान पर आ गई है। इसकी जगह अब भारत की अपनी देसी कंपनियों—महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने ले ली है।
महिंद्रा के लिए यह साल ‘ब्लॉकबस्टर’ रहा। उनकी Thar Roxx और इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने ग्राहकों को अपना दीवाना बना लिया। वहीं टाटा मोटर्स, जो अपनी ‘Curvv’ के साथ उतनी रफ्तार नहीं पकड़ पाई थी, उसने Tata Sierra के साथ वापसी की है। आपको जानकर हैरानी होगी कि नई टाटा सिएरा के लिए महज एक दिन में 70,000 से ज्यादा बुकिंग्स मिल चुकी हैं।
हुंडई की 5 बिलियन डॉलर वाली वापसी की तैयारी
पिछड़ने के बाद हुंडई चुप बैठने वाली नहीं है। कंपनी ने भारत में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए 5 बिलियन डॉलर (करीब 42,000 करोड़ रुपये) के भारी-भरकम निवेश का एलान किया है। हुंडई की योजना आने वाले समय में 26 नई कारें लॉन्च करने की है, जिसमें विशेष रूप से भारत के लिए बनाई गई उनकी पहली ‘हाइब्रिड’ कार भी शामिल होगी।
2026 के लिए क्या है विशेषज्ञों की राय?
नोमुरा के ऑटोमोटिव टेक हेड हर्षवर्धन शर्मा का कहना है कि 2025 हेडलाइन ग्रोथ से ज्यादा ‘नॉर्मलाइजेशन’ का साल था। अब ग्राहक सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वैल्यू और उपयोगिता देखकर गाड़ियां खरीद रहे हैं। वहीं ICRA लिमिटेड के श्रीकुमार कृष्णमूर्ति का मानना है कि अच्छे मानसून, ग्रामीण इलाकों में बेहतर मांग और GST सुधारों की वजह से 2026 में भी सेंटीमेंट पॉजिटिव रहने की उम्मीद है।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी बरकरार हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय एक्सपोर्ट पर लगाए जाने वाले टैरिफ और ग्लोबल सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें साल 2026 के खेल को बिगाड़ भी सकती हैं।
निष्कर्ष: 2026 का साल हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच बड़े मुकाबले का होगा। टाटा और महिंद्रा अपनी धाक बचाने की कोशिश करेंगे, तो मारुति और हुंडई नए अवतार में वापसी करेंगे। कुल मिलाकर फायदा ग्राहकों का ही होने वाला है क्योंकि मुकाबला कड़ा है और विकल्प शानदार।
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