सानों की लॉटरी! अब सरकार दिलाएगी मजदूरों की टेंशन से मुक्ति, खेती में रोबोट और
नई दिल्ली/लखनऊ: भारतीय कृषि का चेहरा साल 2025 में पूरी तरह बदल चुका है। अब खेतों में सिर्फ पसीना नहीं, बल्कि तकनीक और सटीक सरकारी नीतियां बोल रही हैं। संसद में हाल ही में पारित VB-G RAM G Act (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। केंद्र सरकार की इस पहल से न केवल मजदूरों की कमी दूर होगी, बल्कि खेती अब एक हाई-टेक बिजनेस बनने की राह पर है।
मजदूरों की किल्लत खत्म: क्या है नया VB-G RAM G कानून?
खेती के पीक सीजन (बुवाई और कटाई) के दौरान मजदूरों का न मिलना किसानों की सबसे बड़ी सिरदर्दी रही है। सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) की जगह अब VB-G RAM G कानून लागू किया है। इसके तहत मजदूरों को साल में 125 दिन के काम की गारंटी तो मिलेगी ही, लेकिन कानून में विशेष प्रावधान किया गया है कि खेती के मुख्य समय में इन मजदूरों को अनिवार्य रूप से कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “यह कानून किसानों की जरूरतों और मजदूरों के अधिकारों के बीच एक परफेक्ट बैलेंस है।”
नमो ड्रोन दीदी और AI: स्मार्ट बन रहा है अन्नदाता
2025 में ‘डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन’ अपने चरम पर है। अब किसान केवल मौसम के भरोसे नहीं हैं।
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ड्रोन का कमाल: ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत 15,000 महिला समूहों को ड्रोन दिए गए हैं। ये ड्रोन मिनटों में एकड़ भर जमीन पर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, जिससे लागत में 20% तक की कमी आई है।
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स्मार्ट सिंचाई: सेंसर और IoT आधारित सिंचाई सिस्टम अब आम हो रहे हैं। ये सिस्टम मिट्टी की नमी को खुद मापते हैं और जरूरत पड़ने पर ही पानी छोड़ते हैं, जिससे 40% तक पानी की बचत हो रही है।
राज्यों से बड़ी खबरें: गेंदा फूल और धान पर दांव
देश के अलग-अलग राज्यों में भी खेती को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए हैं:
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बिहार की ‘फूल विकास योजना’: बिहार सरकार ने रबी सीजन में गेंदा फूल की खेती के लिए ₹8 करोड़ का बजट मंजूर किया है। किसानों को खेती की लागत पर 50% यानी ₹40,000 प्रति हेक्टेयर तक की सब्सिडी मिलेगी।
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उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड भुगतान: यूपी सरकार ने धान और मिलेट किसानों के खातों में महज 48 घंटे के भीतर ₹2100 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है।
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मध्य प्रदेश में सोयाबीन संकट: एमपी में अत्यधिक बारिश के कारण सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुँचा है, जिसके बाद सरकार ने राहत पैकेज और मुआवजे की प्रक्रिया तेज कर दी है।
MSP और डिजिटल किसान आईडी: पारदर्शिता का नया दौर
सरकार ने 2026 के सीजन के लिए खोपरा (Copra) की MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। वहीं, डिजिटल किसान आईडी का दायरा बढ़ाकर 7.4 करोड़ किसानों तक पहुँचा दिया गया है। लक्ष्य है कि अगले साल तक 11 करोड़ किसानों को इस सिस्टम से जोड़ा जाए ताकि सब्सिडी और सरकारी लाभ सीधे बिना किसी बिचौलिए के किसानों तक पहुँच सकें।
प्रमुख योजनाएं एक नज़र में:
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PM-Kisan: सालाना ₹6,000 की नकद सहायता।
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AgriSURE Fund: स्टार्टअप्स के लिए ₹750 करोड़ का नया फंड।
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PM-KUSUM: सोलर पंप पर 50% तक सब्सिडी, जिससे बिजली का खर्च शून्य।
कृषि क्षेत्र में 2025 का यह साल तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के मिलन का वर्ष है। चाहे वह ड्रोन से छिड़काव हो या नए श्रम कानून, सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—खेती को आधुनिक और मुनाफे वाला बनाना।
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