Current date 21/03/2026

इंसान या हैवान? ‘ईश्वर का आदेश’ बताकर भारतीयों को देश से निकाला, लाशों से भर दी थी नील नदी; पढ़ें इस खौफनाक तानाशाह की दास्तां

URL copied
idi-amin-uganda-dictator-brutal-history-indians-expulsion-hindi
Share URL copied

इतिहास के पन्नों में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जिन्हें याद करते ही रूह कांप जाती है। लेकिन अफ्रीकी देश युगांडा के एक तानाशाह की कहानी इतनी भयावह है कि उसे आज भी ‘मैड मैन ऑफ अफ्रीका’ कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं ईदी अमीन की। एक ऐसा शासक जिसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और जिसके शासनकाल में मौत का तांडव आम बात थी।

जब ‘सपने’ के आधार पर भारतीयों को मिला देश छोड़ने का फरमान

ईदी अमीन 1971 में सैन्य तख्तापलट कर युगांडा की सत्ता पर बैठा था। लेकिन सत्ता संभालने के महज एक साल बाद ही उसने एक ऐसा फैसला लिया जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। अगस्त 1972 में अमीन ने दावा किया कि उसे सपने में ‘ईश्वर का आदेश’ मिला है कि एशियाई मूल के लोगों को युगांडा से बाहर निकाल दिया जाए।

उसने भारतीय मूल के लोगों को देश छोड़ने के लिए महज 90 दिन का समय दिया। अमीन ने धमकी दी कि जो 90 दिनों में नहीं गया, उसे जेल या मौत का सामना करना पड़ेगा। नतीजतन, करीब 90 हजार भारतीयों को अपना घर-बार, जमा-पूंजी और व्यापार छोड़कर रातों-रात भागना पड़ा। ये वही लोग थे जो युगांडा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ थे। उनके जाने के बाद युगांडा की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट गई।

खून और खौफ के 8 साल: कटे सिरों से करता था बातें!

ईदी अमीन का शासन केवल आठ साल (1971-1979) चला, लेकिन ये आठ साल युगांडा के लिए किसी नरक से कम नहीं थे। BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, उसके शासनकाल में करीब 2 लाख से ज्यादा लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। विरोधियों को बिना किसी मुकदमे के उठा लिया जाता और फिर उनके शव भी नहीं मिलते थे।

अमीन की सनक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसे मरे हुए लोगों के साथ समय बिताना पसंद था। खबरों की मानें तो उसने अपने घर में कई नेताओं के कटे हुए सिर रखे थे, जिन्हें देख-देखकर वह बातें किया करता था।

नील नदी और मगरमच्छों का खौफनाक अंत

ईदी अमीन की क्रूरता सिर्फ विरोधियों तक सीमित नहीं थी। उसने विकलांग लोगों को समाज पर ‘बोझ’ करार दिया और हजारों बेगुनाहों को नील नदी में फेंकने का हुक्म सुना दिया। मगरमच्छों से भरी उस नदी में लोगों को जिंदा फेंक दिया जाता था। जब अमीन का शासन खत्म हुआ, तब युगांडा की जमीन से सामूहिक कब्रें और खून से सने इलाके मिले, जिन्हें देखकर संयुक्त राष्ट्र तक दहल गया था।

रसोइए से राष्ट्रपति तक का सफर

ईदी अमीन का जन्म 1925 में युगांडा के कोबोको में हुआ था। वह बहुत कम पढ़ा-लिखा था (सिर्फ चौथी कक्षा तक)। शुरुआत में वह ब्रिटिश सेना में एक मामूली रसोइया था। अपनी कद-काठी और शारीरिक ताकत की वजह से वह सेना में सिपाही बना और बॉक्सिंग में नाम कमाया। धीरे-धीरे वह तरक्की करता गया और सेना के शीर्ष पद तक पहुंच गया। 1971 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति मिल्टन ओबोटे देश से बाहर थे, तब अमीन ने तख्तापलट कर खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया।

कैसे हुआ इस ‘मैड मैन’ का पतन?

अमीन की आक्रामक नीतियों ने उसे अपनों और पड़ोसियों, दोनों का दुश्मन बना दिया। उसने तंजानिया पर हमला करने की गलती की, जिसके बाद तंजानिया की सेना और युगांडा के विद्रोहियों ने मिलकर उसे खदेड़ दिया। अमीन देश छोड़कर भाग गया और अंततः सऊदी अरब में उसकी मौत हुई।

ईदी अमीन भले ही इतिहास का हिस्सा बन चुका है, लेकिन उसकी हैवानियत के घाव आज भी युगांडा और उन हजारों भारतीय परिवारों के जहन में ताजा हैं जिन्हें उसने बेघर किया था।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • Chetan Pawar

    चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

    View all posts
Share URL copied
Written by
Chetan

चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

टेक्नोलॉजी108
विदेश255
देश298
व्यापार106
Adobe CEO शांतनु नारायण ने पद छोड़ने का फैसला किया है
विदेश

Adobe में बड़े बदलाव की तैयारी: CEO शांतनु नारायण छोड़ेंगे अपना पद, कर्मचारियों के नाम लिखा भावुक संदेश

दुनिया की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी एडोबी (Adobe) में एक बड़े युग का अंत होने जा रहा है। कंपनी के भारतीय मूल के...

Papmochani Ekadashi 2026: व्रत के नियम और तुलसी चालीसा
राशिफल

Papmochani Ekadashi 2026: व्रत में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा!

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अपना एक अलग और विशेष महत्व है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी...

Trending Saree Designs 2026: साड़ियों के लेटेस्ट ट्रेंड्स
ट्रेंड्स

इस साल साड़ियों का बदल गया अंदाज़, इन 5 स्टाइल्स के बिना अधूरा है आपका वार्डरोब!

भारतीय नारी की सुंदरता और परंपरा का सबसे बड़ा प्रतीक ‘साड़ी’ अब नए अवतार में हमारे सामने है। साल 2026 में फैशन...

Related Articles