हैदराबाद: अगर आपके पास भी कोई अनजान कॉल आता है जो आपको करोड़ों की लॉटरी या जैकपॉट का लालच देता है, तो सावधान हो जाइए! हैदराबाद से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। यहाँ साइबर ठगों ने एक 77 वर्षीय बुजुर्ग महिला को अपने जाल में फंसाकर पिछले 9 महीनों के भीतर उसके बैंक खातों से 1.8 करोड़ रुपये साफ कर दिए।
हैरानी की बात यह है कि इन जालसाजों ने महिला का विश्वास जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी के नाम के फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया।
कैसे शुरू हुआ ठगी का ये गंदा खेल?
यह पूरी कहानी हैदराबाद के बरकतपुरा इलाके की है। पीड़ित बुजुर्ग महिला ने साइबर क्राइम पुलिस को बताया कि इस साल फरवरी में उनके व्हाट्सएप पर कुछ अनजान नंबरों से कॉल आने शुरू हुए। कॉलर ने दावा किया कि महिला ने ऑनलाइन लॉटरी में 2 करोड़ रुपये का जैकपॉट जीता है। शुरुआत में महिला ने इन कॉल्स को नजरअंदाज किया, लेकिन शातिर ठग हार मानने वाले नहीं थे।
करीब दो हफ्ते बाद, एक शख्स ने खुद को ‘बड़ा बिजनेसमैन’ बताकर महिला से दोबारा संपर्क किया। उसने महिला को झांसा दिया कि इनाम की राशि ट्रांसफर करने के लिए उसे अपने बैंक खाते की डिटेल देनी होगी।
नेट बैंकिंग एक्टिवेट कराकर छीना एक्सेस
ठगों ने देखा कि महिला के बैंक खाते में इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा नहीं है। उन्होंने बड़ी चालाकी से महिला को बैंक भेजकर नेट बैंकिंग एक्टिवेट करवाई और फिर धोखे से उसके क्रेडेंशियल्स (यूजर आईडी और पासवर्ड) हासिल कर लिए। इतना ही नहीं, जालसाजों ने महिला को विश्वास दिलाने के लिए एक फर्जी लेटर भेजा जिस पर प्रधानमंत्री की फोटो और महिला का नाम लिखा था। लेटर में दावा किया गया था कि RBI ने 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है।
RBI अधिकारी बनकर की लूट
ठगी का सिलसिला यहीं नहीं रुका। इसके बाद जालसाजों ने RBI अधिकारी बनकर महिला को डराया और उसे SBI, ICICI और HDFC जैसे अन्य बैंकों में भी नेट बैंकिंग शुरू करने को कहा। ठगों ने महिला और उनके पति के आधार कार्ड, पैन कार्ड और डेबिट कार्ड की फोटो भी मंगवा लीं। साथ ही, महिला के फोन का रिमोट एक्सेस लेने के लिए एक संदिग्ध लिंक भेजा, जिससे फोन का पूरा कंट्रोल उनके हाथ में आ गया।
9 महीनों में 123 बार ट्रांजेक्शन
पुलिस की जांच में सामने आया है कि 13 मार्च से 8 दिसंबर के बीच, ठगों ने चार अलग-अलग बैंकों से 123 बार में छोटी-छोटी रकम निकाली। ऐसा इसलिए किया गया ताकि बैंक का सिक्योरिटी सिस्टम इसे पकड़ न सके। हद तो तब हो गई जब ठगों ने महिला को झांसा देकर उसके और उसके पति के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी समय से पहले बंद करवा दिए। उन्होंने तर्क दिया कि पुरस्कार राशि पाने के लिए खाते में उतनी ही रकम का ‘प्रूफ’ होना जरूरी है।
ऐसे खुला राज
महिला को इस महाठगी का पता तब चला जब वह बैंक पहुंची और देखा कि जिस खाते में करोड़ों होने चाहिए थे, वहां सिर्फ 6,000 रुपये बचे हैं। जब उसने उन नंबरों पर कॉल किया तो वे बंद थे। ठगी का अहसास होते ही उसने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट की धारा 66-C और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (संगठित अपराध और धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
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