H-1B वीजा पर ट्रंप के नए नियमों से भारतीयों की बढ़ेगी टेंशन! लॉटरी सिस्टम खत्म, अब इन लोगों को मिलेगा मौका

h1b-visa-new-rules-trump-impact-on-indians-fees-explained

अमेरिका जाने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए बड़ी खबर है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा नियमों में आमूलचूल बदलाव करने का ऐलान कर दिया है। ये नए नियम 27 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे। सबसे चौंकाने वाला बदलाव यह है कि अब तक चले आ रहे ‘लॉटरी सिस्टम’ को खत्म किया जा रहा है।

इसकी जगह अब ‘वेटेड सिलेक्शन प्रोसेस’ (Weighted Selection Process) यानी उच्च कौशल और अधिक वेतन वालों को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था लागू होगी। आइए जानते हैं कि इन बदलावों का आप पर और भारतीय कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा।

क्या है नया नियम और क्यों हुआ बदलाव?

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि पुराना लॉटरी सिस्टम ‘अंधाधुंध’ था, जिसका फायदा उठाकर कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कामगारों को बुला लेती थीं। नए नियमों के तहत, अब उन्हीं आवेदकों को तरजीह दी जाएगी जिनकी सैलरी अधिक है और जिनके पास विशेष कौशल (High Skills) है।

मुख्य बदलाव:


इन 5 सवालों में समझें पूरा गणित (FAQs)

1. क्या पुराने H-1B होल्डर्स पर भी इसका असर होगा?

फिलहाल यह नियम नए आवेदकों और उन लोगों के लिए है जो पहली बार अमेरिका में एंट्री करना चाहते हैं। जो लोग पहले से अमेरिका में हैं और अपना स्टेटस एक्सटेंड कराना चाहते हैं, उनके लिए फीस के नियमों में कुछ राहत की बात कही गई है। हालांकि, नई भर्तियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

2. 1 लाख डॉलर की फीस किसे देनी होगी?

यह फीस उन नियोक्ताओं (Employers) को देनी होगी जो विदेश से कर्मचारी बुला रहे हैं। यह एक तरह का ‘टैरिफ’ है जिसे अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा के नाम पर लगाया गया है। जानकारों का मानना है कि इससे छोटी कंपनियां और स्टार्टअप्स अब भारतीयों को नौकरी देने से हिचकिचा सकते हैं।

3. एंट्री-लेवल प्रोफेशनल्स का क्या होगा?

सबसे ज्यादा गाज नए ग्रेजुएट्स और शुरुआती करियर वाले इंजीनियर्स पर गिरेगी। चूंकि उनकी सैलरी तुलनात्मक रूप से कम होती है, इसलिए वेटेड सिस्टम में उनका नंबर आना मुश्किल हो जाएगा।

4. क्या भारतीय आईटी कंपनियों की लागत बढ़ेगी?

बिल्कुल! टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के लिए अब अमेरिका में टैलेंट भेजना बेहद महंगा सौदा होगा। कंपनियों को या तो स्थानीय अमेरिकियों को हायर करना होगा या फिर भारी फीस चुकानी होगी।

5. क्या छात्र अब अमेरिका जाना छोड़ देंगे?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय छात्र अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या जर्मनी जैसे देशों का रुख कर सकते हैं, क्योंकि अमेरिका में पढ़ाई के बाद वर्क वीजा मिलना अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन और अनिश्चित हो गया है।


भारतीयों के लिए क्या है आगे की राह?

H-1B वीजा का 70% से अधिक हिस्सा भारतीय प्रोफेशनल्स के पास जाता है। ऐसे में इन कड़े नियमों से भारत-अमेरिका संबंधों और टेक इंडस्ट्री में हलचल मचना तय है। जहां एक ओर एलन मस्क जैसे लोग हाई-स्किल्ड टैलेंट के समर्थन में हैं, वहीं ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने एंट्री-लेवल नौकरियों के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
    फिलहाल वे BigNews18.in पर हिंदी न्यूज़ लिखते हैं, जहां वे हर खबर को तेज़ी, सटीकता और संदर्भ के साथ पेश करते हैं।
    जटिल सूचनाओं को सरल, प्रभावी भाषा में बदलना उनकी खासियत है।

    View all posts
Exit mobile version