किसानों की मौज! सरकार ला रही है 1.75 लाख करोड़ का ‘सुपर प्लान’, अब एक ही जगह मिलेगा इन बड़ी योजनाओं का फायदा

किसानों की मौज! सरकार ला रही है 1.75 लाख करोड़ का 'सुपर प्लान', अब एक ही जगह मिलेगा इन बड़ी योजनाओं का फायदा

नई दिल्ली: देश के अन्नदाताओं की किस्मत बदलने और उनकी आमदनी को दोगुना करने के लिए केंद्र सरकार एक बहुत बड़े ‘मास्टर प्लान’ पर काम कर रही है। अगर आप भी खेती-किसानी से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार अब अलग-अलग चल रही कृषि योजनाओं को एक साथ मिलाकर एक बड़ी और प्रभावी योजना बनाने की तैयारी में है। इस कदम का मकसद न केवल किसानों तक मदद पहुंचाना है, बल्कि राज्यों को भी खेती में सुधार के लिए प्रोत्साहित करना है।

क्या है सरकार का मेगा प्लान?

कृषि मंत्रालय ने एक बड़े पुनर्गठन अभ्यास (Restructuring Exercise) के तहत अपनी प्रमुख योजना ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (PM-RKVY) में तीन अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के विलय का प्रस्ताव दिया है। इस पूरी योजना का अनुमानित बजट अगले पांच वर्षों के लिए करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।

सूत्रों की मानें तो इस विलय के पीछे सरकार की मंशा यह है कि फंड का सही इस्तेमाल हो और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जा सके। अब राज्यों को पैसा उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर मिलेगा। यानी जो राज्य खेती के क्षेत्र में बेहतर सुधार करेगा, उसे बजट का बड़ा हिस्सा दिया जाएगा।

इन योजनाओं का होगा आपस में विलय

जानकारी के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ के साथ जिन योजनाओं को जोड़ा जा रहा है, उनमें शामिल हैं:

  1. कृषि उन्नति योजना (KY)

  2. प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन (NMNF)

  3. राष्ट्रीय मधुमक्खी और शहद मिशन (NBHM)

वर्तमान में इनमें से कुछ योजनाएं केंद्र और राज्य मिलकर चलाते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा संचालित हैं। अब इन सबको एक छतरी के नीचे लाकर खेती, बागवानी और शहद उत्पादन जैसे क्षेत्रों को एक साथ बढ़ावा दिया जाएगा।

5 साल का रोडमैप: अप्रैल 2026 से होगा लागू

यह नई व्यवस्था अगले पांच वर्षों यानी 16वें वित्त आयोग के चक्र के दौरान लागू की जाएगी। इसका कार्यकाल अप्रैल 2026 से शुरू होकर मार्च 2031 तक रहेगा।

फंडिंग के मामले में सरकार ने पुराने फॉर्मूले को ही बरकरार रखा है। अधिकतर राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 का होगा। वहीं, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र 90% खर्च उठाएगा, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए पूरा 100% खर्च केंद्र सरकार ही देगी।

राज्यों को करना होगा सुधार, तभी मिलेगा पैसा

इस बार सरकार ने फंड देने के लिए कड़े नियम बनाए हैं। अब फंड आवंटन 5 मुख्य मापदंडों पर टिका होगा। सबसे खास बात यह है कि 30 प्रतिशत वेटेज केवल इस बात को दिया जाएगा कि राज्य ने कृषि क्षेत्र में क्या सुधार किए हैं और उसने क्या उपलब्धियां हासिल की हैं। यह एक नया मापदंड है, जो राज्यों को खेती की नई तकनीक और सुधारों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का इतिहास

आपको बता दें कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। इसे इसलिए बनाया गया था ताकि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का समग्र विकास हो सके। इसमें राज्यों को पूरी आजादी दी गई थी कि वे अपनी जिला और राज्य कृषि योजनाओं के हिसाब से खेती की गतिविधियों का चुनाव कर सकें। अब इसके नए अवतार में किसानों को और भी अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
    फिलहाल वे BigNews18.in पर हिंदी न्यूज़ लिखते हैं, जहां वे हर खबर को तेज़ी, सटीकता और संदर्भ के साथ पेश करते हैं।
    जटिल सूचनाओं को सरल, प्रभावी भाषा में बदलना उनकी खासियत है।

    View all posts
Exit mobile version