PNG Mandate: जहां पाइपलाइन उपलब्ध वहां PNG लेना अनिवार्य, केंद्र का नया निर्देश

PNG Mandate: जहां पाइपलाइन वहां PNG लेना अनिवार्य, नया नियम

नई दिल्ली: केन्द्र सरकार ने देश के ऊर्जा ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के इस्तेमाल को अनिवार्य बनाने का फैसला किया है। उन क्षेत्रों में जहां PNG की पाइपलाइन और बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद है, वहां घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अनिवार्य रूप से इस स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट होना होगा। सरकार का यह कदम रसोई गैस (LPG) सिलेंडरों पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश ‘नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रिब्यूशन ऑर्डर, 2026’ के मुताबिक, यदि किसी भौगोलिक क्षेत्र में PNG नेटवर्क उपलब्ध है, तो वहां के उपभोक्ताओं को सूचित किए जाने के तीन महीने के भीतर अपनी पुरानी LPG सेवा छोड़नी होगी। मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए होने वाले LPG आयात में संभावित बाधाओं को देखते हुए यह नीतिगत बदलाव किया गया है।

क्या है सरकार का नया आदेश? PNG Mandate

केन्द्र सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) के प्रावधानों के तहत अधिसूचित किया है। इसके तहत, तेल और गैस कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन क्षेत्रों में PNG कनेक्शन को प्राथमिकता दें जहां बुनियादी ढांचा तैयार है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में वर्तमान में करीब 33.37 करोड़ LPG उपभोक्ता हैं, जबकि PNG उपभोक्ताओं की संख्या केवल 1.5 करोड़ है। हालांकि, देश में लगभग 60 लाख ऐसे घर हैं जो पाइपलाइन नेटवर्क के दायरे में तो आते हैं, लेकिन अभी भी सिलेंडर का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

नए नियमों के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) द्वारा अधिकृत कंपनियां ऐसे क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को सूचित करेंगी। यदि कोई उपभोक्ता अधिसूचना मिलने के बावजूद PNG कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उस पते पर LPG सिलेंडर की आपूर्ति 3 महीने बाद बंद कर दी जाएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियम उन इलाकों में लागू होगा जहां बुनियादी ढांचा पूरी तरह तैयार है और गैस कंपनियां कनेक्शन देने की स्थिति में हैं।

सोसायटियों और ऑपरेटरों के लिए कड़े नियम

आदेश में केवल उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि हाउसिंग सोसायटियों और पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनियों के लिए भी समय-सीमा तय की गई है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) या हाउसिंग सोसायटियों को पाइपलाइन बिछाने के लिए ‘राइट ऑफ वे’ (रास्ता देने की अनुमति) की अर्जी मिलने के तीन कार्य दिवसों के भीतर मंजूरी देनी होगी। यदि कोई सोसाइटी इसमें देरी करती है, तो संबंधित घरों की LPG सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

पाइपलाइन ऑपरेटरों को भी मंजूरी मिलने के 48 घंटों के भीतर ‘लास्ट-माइल’ कनेक्शन पूरा करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, कंपनियों को मंजूरी मिलने के चार महीने के भीतर पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू करना होगा। ऐसा न करने पर उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है या उनके विशेषाधिकार अधिकार छीने जा सकते हैं।

तकनीकी खामी पर मिलेगी छूट

हालांकि, सरकार ने उन उपभोक्ताओं के लिए राहत का प्रावधान भी रखा है जहां पाइपलाइन पहुंचाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। ऐसे मामलों में अधिकृत कंपनी द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) जारी किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, “यदि किसी घर में पाइपलाइन पहुंचाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है और कंपनी इसके लिए NOC जारी करती है, तो वहां LPG की आपूर्ति जारी रहेगी।”

लोगों पर असर

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर शहरी मध्यम वर्ग की रसोई पर पड़ेगा। PNG पर शिफ्ट होने का मतलब है कि उपभोक्ताओं को अब सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी के लिए इंतजार नहीं करना होगा। साथ ही, यह LPG के मुकाबले अधिक सुरक्षित और निर्बाध आपूर्ति वाला ईंधन माना जाता है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि आयात पर होने वाले भारी खर्च में भी कटौती होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और उपभोक्ताओं को PNG की ओर प्रोत्साहित करने से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

खास बात यह है कि सरकार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पाइपलाइन बिछाने के काम में देरी न हो। यदि कोई स्थानीय प्राधिकरण तय समय में मंजूरी नहीं देता है, तो उसे ‘डीम्ड अप्रूवल’ यानी स्वतः मंजूर माना जाएगा।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • मयूर फाटक BigNews18.in के संस्थापक हैं। 2024 से वे महाराष्ट्र सरकारी योजना, MPSC भर्ती और केंद्र सरकारी योजनाओं पर हिंदी में शोध-आधारित लेख लिख रहे हैं। विशेषज्ञता: Ladki Bahin Yojana, PM Kisan, MPSC Rajyaseva, PM Awas Yojana। सभी जानकारी आधिकारिक सरकारी सूत्रों पर आधारित। 80+ लेख प्रकाशित। Maharashtra, India।

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