नई दिल्ली: अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको चौंका दिया है। पिछले कुछ दिनों से आसमान छू रहे सोने और चांदी के भाव अचानक जमीन पर आ गिरे हैं। शुक्रवार को हुई भारी गिरावट के बाद सोमवार को भी सर्राफा बाजार में बिकवाली का दौर जारी रहा। सोने की कीमतों में करीब 5% की और गिरावट देखी गई है, जिससे निवेशकों में खलबली मच गई है।
रिकॉर्ड हाई से औंधे मुंह गिरे दाम
महज कुछ दिन पहले तक सोना और चांदी अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर (Record High) पर थे, लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है। स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) की कीमत करीब 5% गिरकर 4,617.07 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। आपको बता दें कि पिछले शुक्रवार को ही सोने में 10% की बड़ी गिरावट आई थी, जब कीमतें 5,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गई थीं।
सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की चमक भी फीकी पड़ गई है। सुरक्षित निवेश के रूप में पसंद की जाने वाली चांदी, जिसमें पिछले दिनों जबरदस्त तेजी देखी गई थी, सोमवार को 4% और टूटकर 80.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। शुक्रवार को तो चांदी में 30% की ‘ऐतिहासिक’ गिरावट दर्ज की गई थी।
क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के भाव?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आ रही खबरें हैं। दरअसल, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के रूप में केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को नामित किया है। वॉर्श को सख्त मौद्रिक नीति (Tight Monetary Policy) का समर्थक माना जाता है। इस खबर के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है और निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली (Profit-taking) शुरू कर दी है।
इंटरएक्टिव ब्रोकर्स के वरिष्ठ अर्थशास्त्री जोस टोरेस के अनुसार, “अब बाजार में ‘बाय अमेरिका’ (Buy America) वाला रुझान लौट आया है। जो सोना-चांदी गुरुवार सुबह तक क्रमशः 5,600 डॉलर और 122 डॉलर के करीब पहुंच गए थे, अब वे नीचे की ओर लुढ़क रहे हैं।”
डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक समीकरण
जब डॉलर मजबूत होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है। इसके अलावा, ट्रंप के उन बयानों ने भी बाजार को प्रभावित किया है जिनमें ईरान के साथ संभावित डील के संकेत दिए गए हैं। इससे युद्ध की आशंकाएं कम हुई हैं और कच्चा तेल (WTI Crude) भी करीब 4% तक गिर गया है।
क्या अब सोना खरीदना चाहिए?
CMC मार्केट्स के क्रिस्टोफर फोर्ब्स का कहना है कि यह गिरावट सोने के लंबे समय के ‘बुलिश’ (तेजी) ट्रेंड का खत्म होना नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य ‘करेक्शन’ है। उन्होंने इसे एक ‘एयर-पॉकेट’ बताया है जो इतनी बड़ी तेजी के बाद आना स्वाभाविक था। जानकारों का मानना है कि अगले 12 महीनों के लिहाज से सोना अभी भी मजबूती दिखा सकता है, बशर्ते फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती जारी रखे।
फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की स्थिरता का इंतजार करें।
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