नई दिल्ली: भारत के कृषि क्षेत्र के लिए साल 2025 खुशियों की नई सौगात लेकर आया है। जहां एक ओर तकनीक ने खेतों में दस्तक दी है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) एक्ट लागू कर किसानों की बरसों पुरानी समस्या का समाधान कर दिया है। 23 दिसंबर 2025 को किसान दिवस के मौके पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि अब बुवाई और कटाई के पीक सीजन में किसानों को मजदूरों की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा।
मनरेगा की जगह आया नया कानून: क्या है खास?
सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) की जगह अब VB-G RAM G कानून को मंजूरी दी है। इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें साल के 125 दिन काम की गारंटी दी गई है, लेकिन खेती के मुख्य सीजन (दो महीने) के दौरान इन मजदूरों को कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मजदूरों को रोजगार मिलेगा और किसानों को समय पर कार्यबल।
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन: अब ‘स्मार्ट’ बनेगा किसान
साल 2025 में भारतीय कृषि सिर्फ मिट्टी और पानी तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (2021-2025) अपने चरम पर है। अब किसान अपने स्मार्टफोन के जरिए सीधे मंडियों के भाव जान रहे हैं और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से मिट्टी की सेहत की जांच कर रहे हैं।
नमो ड्रोन दीदी स्कीम: इस योजना के तहत 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन दिए जा रहे हैं, जो खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव बेहद सटीकता से कर रहे हैं।
AI और सैटेलाइट मैपिंग: अब किसानों को पहले ही पता चल जाता है कि उनकी फसल पर कीटों का हमला होने वाला है या मौसम कैसा रहेगा।
किसानों के लिए 2025 की टॉप योजनाएं
सरकार ने 2025 में कई पुरानी योजनाओं को नए अवतार में पेश किया है ताकि किसानों की आय दोगुनी की जा सके:
| योजना का नाम | मुख्य लाभ |
| PM-Kisan 2025 | सालाना ₹6,000 की सीधी आर्थिक मदद, अब और भी आसान वेरिफिकेशन के साथ। |
| PM-KUSUM | सोलर पंप लगाने पर 50% तक सब्सिडी, बिजली बेचकर अतिरिक्त कमाई। |
| AgriSURE Fund | ₹750 करोड़ का फंड जो कृषि स्टार्टअप्स और ग्रामीण उद्यमियों को बढ़ावा देगा। |
| Fasal Bima Yojana | प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की 100% भरपाई और त्वरित क्लेम निपटारा। |
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक खेती पर जोर
इस साल भारत के कई राज्यों में मौसम के मिजाज ने चिंता बढ़ाई है। ऐसे में सरकार प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) के तहत अब तक लाखों हेक्टेयर जमीन को जैविक खेती के दायरे में लाया जा चुका है। इसके लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹31,500 की सहायता दी जा रही है।
2025 का यह दौर भारतीय किसानों के लिए सशक्तिकरण का दौर है। नई नीतियों, बेहतर तकनीक और सीधे आर्थिक लाभ ने खेती को घाटे के सौदे से बाहर निकालकर एक आधुनिक व्यवसाय में बदल दिया है।
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