आज तक आपने दूध के नाम पर केवल गाय या भैंस के दूध का ही सेवन किया होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आने वाले समय में आपकी चाय या कॉफी में गधी, ऊंटनी या याक का दूध हो सकता है? चौंकिए मत! डेयरी जगत में आजकल ‘फ्यूचर मिल्क’ (Future Milk) को लेकर बहस छिड़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दूध न केवल आपकी सेहत के लिए ‘अमृत’ समान है, बल्कि यह किसानों की किस्मत बदलने वाला ‘सफेद सोना’ भी साबित हो सकता है।
क्यों हो रही है ‘फ्यूचर मिल्क’ की चर्चा?
भले ही सुनने में यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन बकरी, भेड़, ऊंटनी और गधी के दूध में औषधीय गुण (Medicinal Value) गाय-भैंस के मुकाबले कहीं ज्यादा होते हैं। करनाल स्थित नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI) इस दिशा में काफी समय से काम कर रहा है। अब इस चर्चा को बड़ा मंच मिलने वाला है। आगामी 9 से 11 फरवरी तक गुजरात के आनंद में एक बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है, जिसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) और इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (IDF) मिलकर आयोजित कर रहे हैं।
दवाई का काम करेगा यह दूध
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन पशुओं का दूध केवल पोषण ही नहीं देता, बल्कि कई बीमारियों से लड़ने की ताकत भी रखता है। गधी के दूध को लेकर तो NDRI ने FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) को पत्र भी लिखा है ताकि इसे आधिकारिक तौर पर खाद्य पदार्थों की श्रेणी में शामिल किया जा सके। गधी का दूध कॉस्मेटिक्स और दवाइयों में बहुत कीमती माना जाता है।
घटते पशुओं को बचाने की अनूठी पहल
ऊंट, याक और भेड़ जैसे प्राचीन पशुओं की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है। सरकार और वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इन पशुओं के दूध की डिमांड बाजार में बढ़ती है, तो पशुपालक इन्हें पालने में फिर से दिलचस्पी दिखाएंगे।
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याक का जलवा: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और अरुणाचल में पाए जाने वाले याक के दूध से बने पनीर की मांग भारत से ज्यादा विदेशों में है।
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भेड़ और बकरी: दक्षिण भारत में भेड़ों की संख्या काफी ज्यादा है। ये पशु दूध के साथ-साथ ऊन और मांस के लिए भी पालकों को दोहरा मुनाफा देते हैं।
फ्यूचर मिल्क ही क्यों है बेहतर? (मुख्य कारण)
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ज्यादा औषधीय गुण: नॉन-बोवाइन (गाय-भैंस के अलावा) पशुओं के दूध में इंसानी शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व ज्यादा होते हैं।
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कम लागत: गाय-भैंस को पालने के मुकाबले बकरी या भेड़ जैसे छोटे जानवरों को पालना सस्ता पड़ता है।
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बीमारियों से सुरक्षा: NDRI के डायरेक्टर डॉ. धीर सिंह के मुताबिक, इन पशुओं के दूध में मिलने वाले लिपिड, लैक्टोज, इम्युनोग्लोबुलिन और पेप्टाइड्स आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं।
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बढ़ती मांग: बाजार में ऊंटनी के दूध की मांग डायबिटीज के मरीजों के बीच तेजी से बढ़ी है।
क्या कहता है विज्ञान?
विशेषज्ञों के अनुसार, इन जानवरों के दूध में मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्व (Micro-nutrients) शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में बेमिसाल हैं। आज के समय में जब लोग ऑर्गेनिक और नेचुरल प्रोडक्ट्स की ओर भाग रहे हैं, तो ‘फ्यूचर मिल्क’ एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब आपके पास दूध के ढेरों विकल्प होंगे और यह न केवल आपकी सेहत सुधारेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा।
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