Current date 23/03/2026

खुशखबरी! अब छोटी कंपनियों की चांदी: मोदी सरकार ने दी बड़ी राहत, बिजनेस करना हुआ बच्चों का खेल!

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नई दिल्ली: किसी भी देश की तरक्की की रफ़्तार इस बात पर निर्भर करती है कि वहां व्यापार करना कितना आसान है। अगर आप नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, उसे चलाना चाहते हैं या किसी कारणवश बंद करना चाहते हैं, तो इसकी प्रक्रिया जितनी सरल और सस्ती होगी, देश की अर्थव्यवस्था उतनी ही तेजी से भागेगी। भारत अब इसी राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

वर्ल्ड बैंक की लिस्ट में भारत की ऊंची छलांग

दुनिया भर में देशों को इस आधार पर परखा जाता है कि वहां बिजली-पानी के कनेक्शन, टैक्स भरने की सुविधा और कर्ज मिलने में कितनी आसानी है। विश्व बैंक के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ इंडेक्स में भारत ने इस बार कमाल कर दिया है। 190 देशों की सूची में भारत पिछले साल के 77वें पायदान से उछलकर 63वें स्थान पर आ गया है। यानी सीधे 14 अंकों का सुधार! यह बदलाव बताता है कि भारत अब निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है।

छोटी कंपनियां, बड़ा धमाका: 1 दिसंबर से बदले नियम

देश के विकास में बड़ी फैक्ट्रियों से ज्यादा योगदान उन छोटी कंपनियों का होता है जो गली-मोहल्लों और छोटे शहरों से चलती हैं। इन कंपनियों को कागजी कार्रवाई के जाल से बचाने के लिए कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने 1 दिसंबर 2025 से बड़े बदलाव लागू किए हैं।

अब ‘छोटी कंपनी’ की परिभाषा बदल गई है:

  • पेड-अप कैपिटल (चुकता पूंजी): इसकी सीमा 4 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है।

  • टर्नओवर (कारोबार): इसकी सीमा 40 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दी गई है।

इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारी-भरकम टर्नओवर वाली कंपनियां भी ‘छोटी कंपनी’ की श्रेणी में आएंगी और उन्हें कड़े नियमों से मुक्ति मिलेगी।

जेल जाने का डर खत्म: 51 तरह के अपराध अब अपराध नहीं

अक्सर छोटे बिजनेसमैन तकनीकी गलतियों की वजह से कानूनी पचड़ों में फंस जाते थे। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए कंपनी अधिनियम 2013 में सुधार किया है। अब तकनीकी और कागजी चूकों को ‘क्राइम’ की कैटेगरी से बाहर कर दिया गया है। ऐसे 51 मामलों को अब अपराध नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के भी 12 नियमों को सरल किया गया है। इससे अदालतों का बोझ कम होगा और व्यापारी बिना किसी मानसिक तनाव के अपना काम कर सकेंगे।

‘फास्ट ट्रैक’ मर्जर और आसान एग्जिट

अगर दो छोटी कंपनियां आपस में जुड़ना चाहती हैं, तो अब उन्हें सालों इंतज़ार नहीं करना होगा। सितंबर 2025 में ‘फास्ट ट्रैक मर्जर’ के नियमों को और आसान बनाया गया है। अब ‘मानित अनुमोदन’ (Deemed Approval) की व्यवस्था है, यानी अगर शर्तें पूरी हैं तो मर्जर अपने आप मान लिया जाएगा।

इतना ही नहीं, अगर कोई कंपनी बंद करना चाहे, तो उसके लिए मई 2023 में ‘त्वरित कॉरपोरेट निकासी प्रसंस्करण केंद्र’ बनाया गया है। अब कंपनी का नाम रजिस्टर से हटाना भी ‘हसल-फ्री’ हो गया है।

डिजिटल इंडिया का दम

अब सारा काम ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हो रहा है। ‘मास्टर डेटा’ के कारण फॉर्म भरने में गलती की गुंजाइश कम हो गई है। व्यापारियों की मदद के लिए चैटबॉट, वीडियो ट्यूटोरियल और हेल्प सेंटर जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

भविष्य की राह: छोटे व्यापारियों के लिए क्या जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे स्तर के व्यापारियों को या तो पूरी तरह टैक्स फ्री कर देना चाहिए या उन पर टैक्स का बोझ बहुत कम होना चाहिए। साथ ही, लाइसेंस राज को खत्म कर ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लाना जरूरी है ताकि एक ही जगह सारे परमिट मिल जाएं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

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    दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
    फिलहाल वे BigNews18.in पर हिंदी न्यूज़ लिखते हैं, जहां वे हर खबर को तेज़ी, सटीकता और संदर्भ के साथ पेश करते हैं।
    जटिल सूचनाओं को सरल, प्रभावी भाषा में बदलना उनकी खासियत है।

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Divyanshu

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