कंगाल पाकिस्तान के ‘सोने के खजाने’ पर टिकी ट्रंप की नजर! आखिर क्यों गिड़गिड़ा रहा है सुपरपावर अमेरिका?

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दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने कड़े फैसलों और ‘टैरिफ अटैक’ के लिए जाने जाते हैं। ट्रंप की नीतियों से अक्सर दुनिया के बड़े-बड़े देश खौफ खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वही अमेरिका अब एक ऐसे देश की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है जो खुद दाने-दाने को मोहताज है? जी हां, बात हो रही है कंगाल पाकिस्तान (Pakistan) की।

हैरान करने वाली बात यह है कि अमेरिका अब पाकिस्तान से ‘सहयोग’ मांग रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने लोकोमोटिव (रेल इंजन) की बिक्री और पाकिस्तान के मिनरल एक्सप्लोरेशन (खनिज खोज) में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। विशेष रूप से बलूचिस्तान के उस इलाके पर अमेरिका की नजर है, जिसे दुनिया ‘सोने का खजाना’ कहती है।

कंगाल पाकिस्तान से क्यों हाथ मिलाना चाहता है अमेरिका?

पाकिस्तान फिलहाल अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर (Pakistan Economic Crisis) से गुजर रहा है। IMF से लेकर सऊदी और चीन तक, पाकिस्तान हर जगह हाथ फैलाए खड़ा है। ऐसे में अमेरिका का उससे मदद मांगना चौंकता है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान से संपर्क कर अमेरिकी लोकोमोटिव की बिक्री और खनिजों के खनन में तेजी लाने के लिए समझौतों का प्रस्ताव रखा है।

सूत्रों का दावा है कि यह पूरी खिचड़ी तब पकनी शुरू हुई जब अक्टूबर में पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब वॉशिंगटन गए थे। वहां अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा कि ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ के क्षेत्र में पाकिस्तान का सहयोग उनकी प्राथमिकता है।

‘रेको दिक’: वो खजाना जिस पर टिकी है दुनिया की नजर

अमेरिका की असली दिलचस्पी बलूचिस्तान स्थित ‘रेको दिक’ (Reko Diq) खदान में है। इसे दुनिया के सबसे बड़े अविकसित सोने और तांबे के भंडारों में से एक माना जाता है।

क्यों खास है रेको दिक?

यही वजह है कि अमेरिकी कांग्रेस ने जरूरी खनिजों में निवेश के लिए 135 अरब डॉलर का फंड बनाया है। खबर तो यह भी है कि अमेरिकी एग्जिम बैंक ने रेको दिक की माइनिंग कंपनी के लिए 1.25 अरब डॉलर के लोन को हरी झंडी दे दी है।

लोकोमोटिव और AI पर भी फोकस

सिर्फ सोना ही नहीं, अमेरिका अपने 55 लोकोमोटिव (रेलवे इंजन) पाकिस्तान को बेचने के लिए भी जोर लगा रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एनर्जी सेक्टर में भी सहयोग का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान में मौजूद इन बेशकीमती खनिजों के निकालने की प्रक्रिया (Extraction) में तेजी आए ताकि वैश्विक बाजार में उसकी पकड़ मजबूत हो सके।

क्या पाकिस्तान की किस्मत बदलेगी?

साल 2011 से ही रेको दिक परियोजना विवादों और कानूनी अड़चनों में फंसी रही है। अब जब अमेरिका जैसा सुपरपावर इसमें अरबों डॉलर लगाने को तैयार है, तो सवाल उठता है कि क्या यह ‘सोने की खदान’ पाकिस्तान को कंगाली से बाहर निकाल पाएगी? या फिर पाकिस्तान के इस बेशकीमती खजाने पर भी बड़े देशों का कब्जा हो जाएगा?

फिलहाल, ट्रंप की इस ‘मिनरल डिप्लोमेसी’ ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

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