वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने पुराने और सबसे चर्चित एजेंडे ‘ग्रीनलैंड’ को लेकर सुर्खियों में हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की अपनी जिद से पीछे हटने वाले नहीं हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसी चेतावनी दी है जिसने न केवल यूरोप बल्कि रूस और चीन के खेमे में भी खलबली मचा दी है।
क्या है ट्रंप का ‘गोल्डन डोम’ प्रोजेक्ट?
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य (बेहद जरूरी) बताया है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है ट्रंप का महात्वाकांक्षी मेगा प्रोजेक्ट— ‘गोल्डन डोम’ (Golden Dome)।
दरअसल, गोल्डन डोम एक ऐसी सुरक्षा छतरी है, जिसे अमेरिका अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार कर रहा है। यह एक एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तरह काम करेगा, जो किसी भी बाहरी हमले या मिसाइल को आसमान में ही ध्वस्त कर देगा। ट्रंप का मानना है कि इस ‘सुरक्षा कवच’ को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर ट्रंप का सीधा वार
हमेशा की तरह ट्रंप ने अपनी बात रखने के लिए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ का सहारा लिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा:
“अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है। यह हमारे द्वारा बनाए जा रहे ‘गोल्डन डोम’ के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नाटो (NATO) देशों को हमारा नेतृत्व करना चाहिए और पहल करनी चाहिए। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो रूस या चीन इस पर कब्जा कर लेंगे और हम ऐसा कभी होने नहीं देंगे।”
नाटो (NATO) से बड़ी मांग
ट्रंप ने इस बार गेंद नाटो के पाले में डाल दी है। उन्होंने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपने की प्रक्रिया में नाटो देशों को आगे आना चाहिए। ट्रंप का तर्क है कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण मजबूत नहीं करता है, तो भविष्य में यह क्षेत्र रूस या चीन के प्रभाव में जा सकता है, जो पश्चिमी देशों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा होगा।
रूस और चीन की बढ़ती नजरें
आर्कटिक क्षेत्र में जैसे-जैसे बर्फ पिघल रही है, नए व्यापारिक रास्ते और प्राकृतिक संसाधनों (खनिज और गैस) का भंडार सामने आ रहा है। रूस और चीन काफी समय से इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। ट्रंप इसी बात से चिंतित हैं। उनका मानना है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा न केवल अमेरिका को सुरक्षित रखेगा बल्कि रूस और चीन की विस्तारवादी नीतियों पर भी लगाम लगाएगा।
क्या फिर बढ़ेगा तनाव?
याद दिला दें कि अपने पिछले कार्यकाल में भी ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई थी, जिसका डेनमार्क (ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का अधिकार है) ने कड़ा विरोध किया था। अब एक बार फिर ट्रंप के इन तेवरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख डेनमार्क और अन्य यूरोपीय सहयोगियों के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
