अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने पुराने तेवर में लौट आए हैं। चीन के साथ चल रहे ‘ट्रेड वॉर’ (व्यापार युद्ध) में ट्रंप ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने बीजिंग की नींद उड़ा दी है। ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि चीन से आने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स पर अब भारी टैक्स यानी टैरिफ वसूला जाएगा। इसके लिए बकायदा तारीख का ऐलान भी कर दिया गया है।
क्या है ट्रंप का नया ‘टैरिफ गेम’?
डोनाल्ड ट्रंप का ‘टैरिफ कार्ड’ चीन के लिए हमेशा से सिरदर्द रहा है। इस बार निशाना बना है सेमीकंडक्टर सेक्टर, जिसे किसी भी आधुनिक तकनीक की रीढ़ माना जाता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन जून 2027 से चीनी सेमीकंडक्टर चिप्स पर टैरिफ की दरें बढ़ाने जा रहा है।
हालांकि, इसमें एक दिलचस्प मोड़ भी है। ट्रंप ने चीन को फिलहाल 18 महीने की मोहलत दी है। यानी अगले डेढ़ साल तक टैरिफ की दर शून्य (Zero) रहेगी, लेकिन उसके बाद ‘टैरिफ बम’ फूटना तय है। प्रशासन का कहना है कि टैरिफ की सटीक दरें लागू होने से ठीक एक महीने पहले बताई जाएंगी।
23 जून 2027: वो तारीख जब बदलेगा समीकरण
फेडरल रजिस्टर में दाखिल आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 23 जून 2027 की तारीख को अंतिम मुहर लगा दी है। अमेरिका का आरोप है कि चीन सेमीकंडक्टर के कारोबार में ‘अनुचित व्यापारिक तौर-तरीके’ अपना रहा है। अमेरिका का मानना है कि चीन ने दशकों से इस बाजार पर कब्जा करने के लिए आक्रामक और गैर-बाजार नीतियों का सहारा लिया है।
बाइडेन की नीति को ट्रंप ने बढ़ाया आगे
ये टैरिफ कानून की धारा 301 के तहत लगाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इसकी शुरुआत जो बाइडन प्रशासन के दौरान हुई थी, जिसे अब ट्रंप प्रशासन और भी कड़ाई से लागू करने की तैयारी में है। यह मुख्य रूप से उन ‘लीगेसी चिप्स’ (पुरानी तकनीक वाली चिप) पर केंद्रित है, जिनका इस्तेमाल कारों से लेकर घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामानों में बड़े पैमाने पर होता है।
क्यों दी गई 18 महीने की छूट?
जानकारों का मानना है कि ट्रंप का 18 महीने तक टैरिफ को टालने का फैसला एक सोची-समझी रणनीति है।
कंपनियों को तैयारी का मौका: अमेरिकी कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन बदलने के लिए समय चाहिए।
तनाव कम करने की कोशिश: पिछले साल अक्टूबर में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें अमेरिका ने कुछ टैरिफ घटाए थे और बदले में चीन ने ‘रेयर अर्थ मेटल्स’ के निर्यात की इजाजत दी थी। ट्रंप फिलहाल उस शांति को एकदम से भंग नहीं करना चाहते।
अमेरिकी बाजार पर क्या होगा असर?
इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों को अब एक स्पष्ट रोडमैप मिल गया है। उन्हें पता है कि 2027 के बाद चीन से चिप्स मंगवाना महंगा पड़ेगा, इसलिए वे अब विकल्प तलाशना शुरू कर सकती हैं। हालांकि, यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या चीन इसका जवाब अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाकर देता है या नहीं।
कुल मिलाकर, ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब तकनीक के मामले में चीन की दादागिरी बर्दाश्त नहीं करेगा। ‘मेड इन चाइना’ चिप्स पर लगने वाला यह टैक्स भविष्य में ग्लोबल टेक मार्केट की तस्वीर बदल सकता है।
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