एक्टिंग की दुनिया बाहर से जितनी चकाचौंध भरी दिखती है, अंदर से उतनी ही चुनौतीपूर्ण होती है। अक्सर सुना जाता है कि कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए उसमें इस कदर डूब जाते हैं कि असल जिंदगी और पर्दे की दुनिया के बीच का फर्क भूल जाते हैं। लोकप्रिय वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ में ‘मुन्ना भइया’ का कालजयी किरदार निभाने वाले और ‘प्यार का पंचनामा’ में ‘लिक्विड’ बनकर सबको हंसाने वाले दिव्येंदु शर्मा के साथ एक ऐसा ही डरावना वाकया पेश आया था। दिव्येंदु अपने एक किरदार में इतने खो गए थे कि उन्होंने नींद में अपनी ही पत्नी की गर्दन दबोच ली थी।
जब रीयल लाइफ में ‘मुन्ना भइया’ बन गए खतरनाक!
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान दिव्येंदु शर्मा ने अपनी जिंदगी के उस खौफनाक अनुभव को साझा किया, जिसे सुनकर उनके फैंस भी हैरान हैं। दिव्येंदु ने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन पर उनका कैरेक्टर इस कदर हावी हो गया था कि उनके दिमाग ने सही और गलत का अंतर करना बंद कर दिया था। इसका असर यह हुआ कि एक रात सोते समय उन्होंने अनजाने में अपनी पत्नी आकांक्षा का गला पकड़ लिया।
स्कॉटलैंड की वो डरावनी रात
मैशेबल इंडिया के साथ बातचीत में दिव्येंदु ने खुलासा किया, “हम स्कॉटलैंड में एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे और मेरी पत्नी आकांक्षा भी मेरे साथ थीं। उस किरदार का बोझ मेरे दिमाग पर इतना ज्यादा था कि मुझे रात में सोते हुए पता ही नहीं चला और मैंने अचानक उनका गला दबोच लिया।”
दिव्येंदु ने आगे बताया कि जब उन्हें अपनी हरकत का एहसास हुआ, तो वह बुरी तरह डर गए थे। वह कहते हैं, “इस घटना ने मुझे अंदर तक हिलाकर रख दिया। वह फिल्म एक पति-पत्नी के रिश्तों और उनकी पहचान के इर्द-गिर्द थी। मैं काफी समय तक इस बात को लेकर गिल्ट (पछतावे) में रहा।”
राधिका आप्टे ने बताया इसके पीछे का कड़वा सच
इसी इंटरव्यू में दिव्येंदु के साथ मौजूद रहीं मशहूर एक्ट्रेस और ओटीटी क्वीन राधिका आप्टे ने इस पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि एक्टर्स के साथ ऐसा क्यों होता है। राधिका के मुताबिक, इसके पीछे की मुख्य वजह काम का अत्यधिक दबाव और थकान है।
राधिका ने कहा, “मुझे लगता है कि ऐसी चीजें इसलिए होती हैं क्योंकि सेट पर कलाकारों और क्रू मेंबर्स से ‘ओवरटाइम’ कराया जाता है। चाहे एक्टर्स हों या एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर्स (EP), उनसे इतना काम लिया जाता है कि हफ्तों और महीनों तक उन्हें ठीक से नींद नहीं मिल पाती। जब शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो इस तरह की मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रियाएं होना स्वाभाविक है।”
यादगार किरदारों का भारी बोझ
दिव्येंदु शर्मा आज इंडस्ट्री का वो नाम हैं जिन्होंने ‘लिक्विड’ जैसे मासूम किरदार से लेकर ‘मुन्ना भइया’ जैसे सनकी विलेन तक को बखूबी जिया है। लेकिन उनकी यह आपबीती बताती है कि पर्दे पर दिखने वाला वो ‘स्वैग’ कभी-कभी कलाकारों की मानसिक शांति पर कितना भारी पड़ जाता है। दिव्येंदु की इस कहानी ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटों और मेंटल हेल्थ पर बहस छेड़ दी है।
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