Zomato CEO की कनपटी पर ये क्या है? ₹225 करोड़ का ‘Temple’ डिवाइस, जो रोक देगा बुढ़ापा!

Zomato CEO की कनपटी पर ये क्या है? ₹225 करोड़ का 'Temple' डिवाइस, जो रोक देगा बुढ़ापा!

नई दिल्ली: जोमैटो (Zomato) के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल ( Deepinder Goyal ) अक्सर अपनी अनोखी बिजनेस स्ट्रैटेजी के लिए सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इस बार मामला खाने की डिलीवरी का नहीं, बल्कि ‘अमर’ होने की तकनीक का है। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान दीपिंदर गोयल की कनपटी (Temple) पर एक छोटा सा सिल्वर रंग का डिवाइस चिपका हुआ देखा गया, जिसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है। लोग हैरान हैं कि आखिर यह ‘रहस्यमयी’ गैजेट क्या है? क्या यह कोई नया हेडफोन है या भविष्य की कोई सुपर-ह्यूमन तकनीक?

क्या है यह ‘Temple’ डिवाइस?

सोशल मीडिया पर ‘च्युइंग गम’ और ‘एक्सटर्नल एसएसडी’ जैसे नामों से ट्रोल होने वाला यह छोटा सा यंत्र असल में एक बेहद एडवांस हेल्थ-टेक वियरेबल है, जिसे ‘Temple’ नाम दिया गया है। दीपिंदर गोयल ने खुद इसका खुलासा करते हुए बताया कि यह कोई साधारण गैजेट नहीं, बल्कि एक एक्सपेरिमेंटल डिवाइस है जो रियल-टाइम में उनके दिमाग में होने वाले ब्लड फ्लो (Brain Blood Flow) को ट्रैक करता है।

सीधे शब्दों में कहें तो, यह डिवाइस आपके दिमाग तक पहुँचने वाले खून की मात्रा और उसकी गति पर नज़र रखता है। गोयल का दावा है कि वह पिछले एक साल से खुद पर इसका ट्रायल कर रहे हैं।

225 करोड़ का निवेश और ‘ग्रेविटी’ वाली थ्योरी

इस प्रोजेक्ट के पीछे दीपिंदर गोयल की एक दिलचस्प थ्योरी है, जिसे वह ‘ग्रेविटी एजिंग हाइपोथेसिस’ (Gravity Ageing Hypothesis) कहते हैं। उनका मानना है कि इंसान की उम्र बढ़ने और मौत के पीछे एक बड़ा कारण ‘गुरुत्वाकर्षण’ (Gravity) है। गोयल के अनुसार, चूंकि इंसान अपना ज्यादातर वक्त खड़े होकर या बैठकर बिताता है, इसलिए गुरुत्वाकर्षण की वजह से दिमाग तक खून पहुँचाना मुश्किल हो जाता है। वक्त के साथ दिमाग को कम खून मिलता है, जिससे कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं और बुढ़ापा आता है।

इस रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी ‘Eternal’ और ‘Continue Research’ के जरिए करीब 25 मिलियन डॉलर (यानी लगभग 225 करोड़ रुपये) का व्यक्तिगत निवेश किया है। उनका लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाकर बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है।

AIIMS के डॉक्टर ने बताया ‘महंगा खिलौना’

जहां एक तरफ तकनीक के दीवाने इसे क्रांतिकारी बता रहे हैं, वहीं मेडिकल जगत में इसे लेकर काफी संदेह है। एम्स (AIIMS) दिल्ली के एक रेडियोलॉजिस्ट और एआई रिसर्चर, डॉ. सुव्रंकर दत्ता ने इसे सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि इस डिवाइस का फिलहाल कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने इसे “अरबपतियों के लिए एक महंगा खिलौना” करार दिया और आम लोगों को सलाह दी कि वे ऐसे बिना प्रमाणित उपकरणों पर अपना पैसा बर्बाद न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि कनपटी की नसों से दिमाग के अंदरूनी हिस्से के ब्लड फ्लो का सटीक अंदाजा लगाना वैज्ञानिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

क्या यह Zomato का प्रोडक्ट है?

दीपिंदर गोयल ने साफ किया है कि ‘Temple’ जोमैटो का कोई कमर्शियल प्रोडक्ट नहीं है और न ही फिलहाल इसे बेचने की कोई योजना है। यह उनकी निजी जिज्ञासा और रिसर्च का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी ‘ग्रेविटी थ्योरी’ गलत भी साबित होती है, तब भी दिमाग के ब्लड फ्लो को ट्रैक करने वाला यह डेटा भविष्य में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों और एकाग्रता (Focus) बढ़ाने के काम आ सकता है।

फिलहाल, दीपिंदर गोयल का यह डिवाइस चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या वाकई तकनीक के जरिए हम अपनी उम्र को मात दे पाएंगे? या यह सिर्फ एक और स्टार्टअप आइडिया बनकर रह जाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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