राजस्थान के जयपुर के दूदू इलाके में प्यार और नफरत की ऐसी दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। प्रेम में डूबा एक जोड़ा—कैलाश और सोनी—अपनी जिंदगी के कुछ शांत पल साथ बिताने पहुंचे थे, लेकिन उनसे उनकी आखिरी सांसें छीन ली गईं। खेत की मचान पर मौजूद इस जोड़े को जिंदा जला दिया गया। पहले कैलाश की मौत हुई, और अब सोनी भी ज़िंदगी की जंग हार चुकी है। पीछे छूट गए सिर्फ उनके दो-दो छोटे बच्चे, जिनका भविष्य चीख-चीखकर इंसाफ मांग रहा है।
देर रात सोनी मिलने आई, और मौत की साजिश तैयार थी
घटना कुछ दिन पहले की है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। शनिवार देर रात विधवा सोनी गुर्जर अपने प्रेमी कैलाश गुर्जर से मिलने खेत में बनी मचान पर पहुंची थी। दोनों अपने प्यार की दुनिया में खोए हुए थे, बाहों में बाहें डाले बैठे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि अंधेरे में कोई उनकी मौत की पटकथा लिख चुका है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसी दौरान सोनी के चचिया ससुर और जेठ वहां पहुंचे। मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने पेट्रोल छिड़का और दोनों को जिंदा आग के हवाले कर दिया। चीखते-चिल्लाते दोनों वहीं तड़पते रह गए।
रंजिश की आग, जिसने दो जिंदगियां छीन लीं
मौखमपुरा थाना क्षेत्र के बाडोलाव गांव में यह वारदात शुक्रवार रात करीब 2 बजे हुई। कैलाश और सोनी के परिवार रिश्तेदार बताए जाते हैं, लेकिन पिछलें कुछ समय से दोनों परिवारों में गहरी रंजिश थी। हालात इतने बिगड़े हुए थे कि कहा जाता है—दोनों घर एक-दूसरे का मुंह तक देखना पसंद नहीं करते थे।
ऐसे में सवाल उठते हैं—जब दोनों परिवार आपस में इतने खफा थे, तो यह प्यार कैसे पनपा?
कैलाश के परिवार का आरोप है कि असल निशाना कैलाश था, सोनी को तो केवल एक बहाना बनाया गया। उनका कहना है कि महिला को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर कैलाश की हत्या कर दी गई।
एक साल पुरानी घटना ने बढ़ाई थी दुश्मनी
इस घटना की जड़ें कहीं और जाकर जुड़ती हैं। सूत्रों के मुताबिक, करीब एक साल पहले सोनी के जेठ के बेटे और कैलाश के भाई की बेटी ने प्रेम विवाह कर लिया था। यही वो चिंगारी थी, जिसने दोनों परिवारों के बीच तनाव को आग में बदल दिया। तब से नफरत की लकीर लगातार गहरी होती गई।
माना जा रहा है कि इसी दुश्मनी का फायदा उठाकर सोनी के ससुराल वालों ने इस मौके को बदले का हथियार बना लिया।
सोनी पहले से विधवा, फिर क्यों लिया इतना जोखिम?
सोनी की जिंदगी पहले ही मुश्किलों से भरी थी। छह साल पहले उसके पति की मौत हो चुकी थी। दो बच्चों की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। कैलाश भी शादीशुदा था और उसके भी दो बच्चे हैं।
इसके बावजूद जब दोनों की मुलाकात हुई, तो एक-दूसरे की अकेली जिंदगी में सहारा बन गए। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। लेकिन इस प्यार की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
चार मासूम अनाथ… और इंसाफ की उम्मीद
कैलाश और सोनी दोनों इस दुनिया से जा चुके हैं। पीछे रह गए चार छोटे बच्चे—जो अब अनाथ हो चुके हैं और इंसाफ की आस में बैठे हैं। पूरे गांव में इस घटना को लेकर गुस्सा और आक्रोश है। लोग यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि क्या किसी को इस तरह किसी की जिंदगी छीनने का हक है?
पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्यार की राह जब नफरत से टकराती है, तो अंजाम कितनी दर्दनाक हो सकती है।
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