क्या हम भारत को बांग्लादेश बनाना चाहते हैं? चर्च पर हमलों को लेकर कांग्रेस का बीजेपी-RSS पर तीखा प्रहार!

congress-targets-bjp-rss-over-church-attacks-pawan-khera-statement

नई दिल्ली: क्रिसमस के मौके पर देश के कुछ हिस्सों में चर्च और ईसाई समुदाय के लोगों पर हुए कथित हमलों ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सहित आरएसएस (RSS) पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कड़े शब्दों में सवाल किया है कि क्या हम अपने देश की तुलना पड़ोसी देश बांग्लादेश से करना चाहते हैं?

“क्या जिन्ना का सपना यहाँ पूरा करना है?”

मीडिया एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए पवन खेड़ा ने बीजेपी की विचारधारा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “आप कैसा भारत बनाना चाहते हैं? क्या यह आरएसएस का सपना था? जो काम जिन्ना पाकिस्तान में नहीं कर पाए, क्या आप उसे यहाँ (भारत में) पूरा करना चाहते हैं? आखिर इस सबका मतलब क्या है?”

खेड़ा ने आगे कहा कि भारत एक ऐसा देश रहा है जहाँ सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर अपने त्योहार मनाते आए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या हम भी वही करना चाहते हैं जो बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ होता है? क्या हम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर खुद को गौरवान्वित महसूस करना चाहते हैं?

“मस्जिद के बाहर नाचने और उकसाने की क्या जरूरत?”

धार्मिक स्थलों के बाहर होने वाली नारेबाजी और हंगामे पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत की सभ्यता नहीं हो सकती। उन्होंने सवाल उठाया, “हनुमान जयंती पर मस्जिद के बाहर जाकर नाचने की क्या जरूरत है? वहाँ उकसाने वाले गाने बजाने का क्या तुक है? आप हनुमान चालीसा पढ़िए, हम भी पढ़ते हैं और सम्मान करते हैं। लेकिन क्रिसमस के दिन चर्च के बाहर जाकर हनुमान चालीसा पढ़कर आप क्या साबित करना चाहते हैं?” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह न तो हमारा धर्म है और न ही हमारी संस्कृति।

स्वामी विवेकानंद का दिया हवाला

इतिहास और परंपराओं का जिक्र करते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि जो लोग आज विरोध कर रहे हैं, शायद उन्हें पता नहीं कि स्वामी विवेकानंद भी हर साल 25 दिसंबर को ‘यीशु पर्व’ मनाते थे। आज भी रामकृष्ण मिशन में विवेकानंद जी की याद में यह परंपरा निभाई जाती है।

‘वन नेशन, वन लैंग्वेज, वन रिलिजन’ के विचार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “यह क्या मजाक है? भारत हमेशा से विविधताओं का देश रहा है। यहाँ अलग-अलग भाषाएं, धर्म और संस्कृतियां एक साथ फलती-फूलती हैं। फिर सब कुछ थोपने की कोशिश क्यों हो रही है? बीजेपी और संघ को इतनी असुरक्षा क्यों है?”

पादरी की अपील: “उन्हें माफ कर देना ही बेहतर”

दूसरी ओर, पार्लियामेंट स्ट्रीट जोमी क्रिश्चियन फेलोशिप के पादरी नेल्सन टकलल ने इन हमलों पर शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “प्रभु यीशु मसीह ने हमें माफ करना सिखाया है। जो लोग यीशु के नाम पर चर्चों पर हमला कर रहे हैं, मैं उनसे यही कहूँगा कि उन्हें माफ कर देना ही सबसे अच्छा रास्ता है।”

लेखक

  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
    फिलहाल वे BigNews18.in पर हिंदी न्यूज़ लिखते हैं, जहां वे हर खबर को तेज़ी, सटीकता और संदर्भ के साथ पेश करते हैं।
    जटिल सूचनाओं को सरल, प्रभावी भाषा में बदलना उनकी खासियत है।

    View all posts
Exit mobile version