सावधान! चीन ने साधारण मालगाड़ी जहाज को बना डाला ‘मिसाइल डिपो’, तस्वीरें देख दुनिया भर की नौसेनाओं में मचा हड़कंप

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ड्रैगन की चालबाजियों से पूरी दुनिया वाकिफ है, लेकिन इस बार चीन ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसने रक्षा विशेषज्ञों की रातों की नींद उड़ा दी है। चीन के इंटरनेट पर कुछ ऐसी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें एक साधारण दिखने वाला कार्गो (माल ढोने वाला) जहाज खतरनाक मिसाइलों से लैस नजर आ रहा है। झोंग डा 79 (Zhong Da 79) नाम के इस मध्यम आकार के कंटेनर जहाज को चीन ने एक चलते-फिरते ‘किले’ में तब्दील कर दिया है।

क्या है यह ‘झोंग डा 79’ का रहस्य?

पहली नजर में यह जहाज किसी सामान्य व्यापारिक जहाज जैसा दिखता है, लेकिन इसके डेक पर कंटेनरों के भीतर वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) छिपा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने साधारण कंटेनरों को मिसाइल लॉन्च पैड में बदल दिया है।

इस जहाज की मारक क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस पर करीब 60 बड़े VLS सेल लगे हैं। हर कंटेनर में 4 लॉन्च ट्यूब हैं। तकनीकी रूप से देखें तो यह एक साथ इतनी मिसाइलें दाग सकता है, जो अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक ‘अरलेघ बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर’ की क्षमता का लगभग दो-तिहाई है।

इन हथियारों से है लैस

यह सिर्फ एक मिसाइल वाहक नहीं है, बल्कि पूरी तरह से आत्मरक्षा और हमले के लिए तैयार है:

शंघाई के शिपयार्ड से आई सैटेलाइट तस्वीरें

यह रहस्यमयी जहाज फिलहाल शंघाई के एक शिपयार्ड में खड़ा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच इसमें भारी बदलाव किए गए हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ जैसे रिक जो का मानना है कि कंटेनरों पर लिखे कुछ मजाकिया शब्दों की वजह से यह सिर्फ एक ‘मॉकअप’ या ट्रायल मॉडल भी हो सकता है। लेकिन रडार और हथियारों की फिटिंग इतनी मजबूत है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्यों डरी हुई है दुनिया?

चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा कमर्शियल शिपिंग फ्लीट है। विशेषज्ञों की चिंता यह है कि अगर चीन ने अपने हजारों व्यापारिक जहाजों को इसी तरह ‘आर्सेनल शिप’ (मिसाइल ले जाने वाले जहाज) में बदल दिया, तो युद्ध के समय इन्हें पहचानना नामुमकिन होगा। ये जहाज सामान्य समुद्री ट्रैफिक में छिपकर दुश्मन पर अचानक हमला कर सकते हैं।

चीन पहले भी अपने व्यापारिक जहाजों का इस्तेमाल हेलीकॉप्टर कैरियर और युद्धाभ्यास के लिए कर चुका है। हालांकि अमेरिका भी इस तकनीक पर काम कर रहा है, लेकिन चीन की जहाज बनाने की रफ्तार अमेरिका से कहीं ज्यादा तेज है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो समंदर में शक्ति का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

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