अमेरिका की उंगली और ड्रैगन की आग! भारत पर पेंटागन की ‘डरावनी’ रिपोर्ट देख भड़का चीन, दिया करारा जवाब

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बीजिंग: दुनिया की दो महाशक्तियों, अमेरिका और चीन के बीच जुबानी जंग अब एक नए मोड़ पर आ गई है। पिछले कुछ दिनों से अमेरिका का रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) अपनी रिपोर्ट्स के जरिए चीन की घेराबंदी करने में जुटा था। पेंटागन ने दावा किया था कि चीन न सिर्फ भारत के खिलाफ गहरी साजिशें रच रहा है, बल्कि वह भारत-अमेरिका की दोस्ती में भी दरार डालना चाहता है। अब इन आरोपों पर ‘ड्रैगन’ ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और अमेरिका को ऐसा जवाब दिया है जो किसी ‘फायर’ से कम नहीं है।

क्या था पेंटागन की रिपोर्ट में?

पेंटागन ने हाल ही में ‘मिलिट्री एंड सिक्योरिटी डेवलपमेंट्स इन्वॉल्विंग द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में भारत को केंद्र में रखते हुए चीन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि:

चीन का पलटवार: ‘तीसरा पक्ष दखल न दे’

अमेरिका के इन दावों पर बीजिंग ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अमेरिका को आईना दिखाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा पर हालात अब “सामान्य और स्थिर” हैं।

लिन जियान ने कहा, “भारत और चीन के बीच बातचीत के चैनल (Communication Channels) सही तरीके से काम कर रहे हैं। ऐसे में किसी तीसरे देश (अमेरिका) की बेवजह की टिप्पणियां हमें मंजूर नहीं हैं। चीन ऐसी दखलंदाजी का कड़ा विरोध करता है।”

अमेरिका पर लगाया ‘प्रोपेगेंडा’ फैलाने का आरोप

चीन ने केवल सफाई ही नहीं दी, बल्कि अमेरिका पर हमला भी बोला। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अमेरिका जानबूझकर चीन की रक्षा नीति (Defense Policy) को दुनिया के सामने गलत तरीके से पेश कर रहा है। चीन के मुताबिक, अमेरिका का असली मकसद बाकी देशों के साथ चीन के रिश्तों में जहर घोलना है ताकि वह अपनी मिलिट्री बादशाहत को पूरी दुनिया में बरकरार रख सके।

क्या भारत की पीठ में छुरा घोंप रहा है चीन?

पेंटागन की रिपोर्ट ने एक डरावना दावा यह भी किया था कि चीन मौका मिलते ही भारत की पीठ में छुरा घोंप सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, एलएसी (LAC) पर तनाव कम करने का नाटक महज एक चाल है। हालांकि, चीन ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीन ने मैसेज दिया है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ मामलों को सुलझाने में सक्षम है और अमेरिका को अपनी ‘नाक’ दूसरे देशों के मुद्दों में नहीं घुसानी चाहिए।

निष्कर्ष

फिलहाल, चीन के इस जवाब ने यह साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को अमेरिका के चश्मे से नहीं देखना चाहता। लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या वाकई सीमा पर शांति है, या यह ड्रैगन की किसी बड़ी चाल से पहले की खामोशी है? विशेषज्ञों की मानें तो चीन का यह बयान अमेरिका को यह बताने की कोशिश है कि वह एशिया के मामलों में बॉस न बने।


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लेखक

  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
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