सुपरपावर अमेरिका और ड्रैगन (चीन) के बीच दुश्मनी अब सातवें आसमान पर पहुंच गई है। ताइवान को हथियारों की भारी सप्लाई करने के अमेरिकी फैसले से चीन इस कदर बौखला गया है कि उसने सीधे जंग की चेतावनी दे दी है। जवाबी कार्रवाई करते हुए चीन ने अमेरिका की 20 दिग्गज रक्षा कंपनियों (Defense Firms) और 10 शीर्ष अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
चीन का मानना है कि अमेरिका का यह कदम उसके ‘ताइवान एकीकरण’ के सपने में सबसे बड़ा रोड़ा है। आइए जानते हैं कि इस बार ड्रैगन ने अमेरिका को किस तरह घेरने की कोशिश की है।
‘रेड लाइन’ पार करने की मिलेगी सजा!
चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक तीखा बयान जारी कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन कंपनियों पर बैन लगाया गया है, चीन में मौजूद उनकी सभी संपत्तियों को तुरंत प्रभाव से ‘फ्रीज’ कर दिया गया है। इसके अलावा, कोई भी चीनी नागरिक या संस्था अब इन कंपनियों के साथ किसी भी तरह का लेनदेन नहीं कर सकेगी।
चीन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा, “ताइवान का मुद्दा हमारे मूल हितों का केंद्र है। यह चीन-अमेरिका संबंधों की वह ‘रेड लाइन’ है, जिसे पार करने की कोशिश भी भारी पड़ेगी। जो भी ताइवान को हथियार बेचेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी ही होगी।”
ड्रैगन की हिट लिस्ट में कौन-कौन?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने जिन कंपनियों पर गाज गिराई है, उनमें रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं:
नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉरपोरेशन
एल3हैरिस मैरीटाइम सर्विसेज
बोइंग (Boeing)
एंड्यूरिल इंडस्ट्रीज
सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि एंड्यूरिल इंडस्ट्रीज के संस्थापक पामर लकी समेत 10 अमेरिकी नागरिकों के चीन में प्रवेश और व्यापार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
आखिर क्यों लगा अमेरिका को झटका?
विवाद की असली वजह है डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का वह फैसला, जिसमें अमेरिका ने ताइवान को 10 अरब डॉलर (करीब 84,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा के हथियार बेचने का ऐलान किया है। अगर अमेरिकी संसद इस डील को मंजूरी दे देती है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा हथियार पैकेज होगा। अमेरिका कानूनन ताइवान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे किसी भी हाल में कब्जाना चाहता है।
महायुद्ध की आहट?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव किसी भी दिन सैन्य टकराव में बदल सकता है। चीन पिछले कुछ वर्षों से ताइवान की सीमाओं पर लगातार युद्धपोतों और फाइटर जेट्स के जरिए ‘मिलिट्री ड्रिल’ कर रहा है। वह लगभग हर रोज ताइवान की तैयारियों को परखता है। वहीं, अमेरिका की इस नई डील ने चीन के गुस्से में आग में घी डालने का काम किया है।
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