बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का बड़ा धमाका! NDA के 9 विधायकों की लगी लॉटरी, मिला राज्यमंत्री का दर्जा; देखें पूरी लिस्ट

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पटना: बिहार की सियासत से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा दांव खेलते हुए एनडीए (NDA) के 9 विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। बिहार सरकार ने इन विधायकों को ‘राज्यमंत्री’ का दर्जा दे दिया है। सोमवार को संसदीय कार्य विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना (Notification) भी जारी कर दी है।

नीतीश कुमार के इस फैसले को आगामी चुनावों और गठबंधन की मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस लिस्ट में किन-किन दिग्गजों के नाम शामिल हैं और किसे कौन सा पद मिला है।


श्रवण कुमार बने मुख्य सचेतक, विनोद नारायण झा को भी मिली जिम्मेदारी

जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दिग्गज नेता और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार को सत्तारूढ़ दल का ‘मुख्य सचेतक’ (Chief Whip) बनाया गया है। नियम के मुताबिक, मुख्य सचेतक का पद ‘कैबिनेट मंत्री’ के बराबर होता है। हालांकि, श्रवण कुमार पहले से ही नीतीश कैबिनेट में मंत्री हैं, इसलिए उन्हें अलग से कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दी जाएगी।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता विनोद नारायण झा को ‘उपमुख्य सचेतक’ (Deputy Chief Whip) की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, एनडीए के 8 अन्य विधायकों को ‘सचेतक’ (Whip) नियुक्त किया गया है।


इन 8 विधायकों को मिला ‘सचेतक’ का पद

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मनोनयन पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अपनी मुहर लगा दी है। यह सभी नियुक्तियां 15 दिसंबर से प्रभावी मानी जाएंगी। जिन विधायकों को सचेतक बनाया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  1. कृष्ण कुमार ऋषि

  2. मंजीत कुमार सिंह

  3. राजू तिवारी

  4. सुधांशु शेखर

  5. कुमार शैलेन्द्र

  6. रामविलास कामत

  7. अरुण मांझी

  8. गायत्री देवी

बड़ी बात: इन सभी विधायकों को अब राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त होगा और उन्हें वे सभी सरकारी सुविधाएं, भत्ते और सुरक्षा मिलेगी जो एक राज्यमंत्री को दी जाती है।


प्रशासनिक महकमे में भी हुए बड़े बदलाव

सिर्फ विधायकों को ही नहीं, बल्कि मंत्रियों की टीम को भी मजबूती दी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग की एक अन्य अधिसूचना के अनुसार, बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के तीन अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है।

क्यों अहम है यह फैसला?

बिहार की राजनीति में सचेतक (Whip) का पद बहुत महत्वपूर्ण होता है। सदन के भीतर पार्टी के अनुशासन को बनाए रखने और विधायकों की मौजूदगी सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका अहम होती है। नीतीश कुमार ने इस फैसले के जरिए न केवल जातीय समीकरण को साधने की कोशिश की है, बल्कि गठबंधन के भीतर असंतोष को दूर करने के लिए ‘रेवड़ी’ के बजाय ‘जिम्मेदारी’ बांटने का काम किया है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

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