Current date 22/03/2026

भोपाल की यूनिवर्सिटी में लड़कियों को दी जा रही है ‘आदर्श बहू’ की ट्रेनिंग, जानें क्यों शुरू हुआ ये अनोखा सेंटर

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भोपाल की यूनिवर्सिटी में लड़कियों को दी जा रही है ‘आदर्श बहू’ की ट्रेनिंग, जानें क्यों शुरू हुआ ये अनोखा सेंटर
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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक यूनिवर्सिटी ने एक अनोखी पहल की है। यहां सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय (नूतन कॉलेज) में ‘विवाह एवं परिवार परामर्श केंद्र’ शुरू किया गया है। इस सेंटर का मकसद है छात्राओं को परिवार का महत्व, पारिवारिक मूल्य और कानूनी अधिकार समझाना, ताकि वे भविष्य में सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकें।

क्यों खोला गया यह सेंटर?

आजकल घरेलू हिंसा और परिवारिक विवादों के चलते रिश्ते टूट रहे हैं। कई बार नई बहू ससुराल में एडजस्ट नहीं कर पाती या फिर परिवार का माहौल उसके लिए चुनौती बन जाता है। ऐसे हालात को देखते हुए कॉलेज ने छात्राओं को ‘आदर्श बहू’ बनाने की दिशा में कदम उठाया है।

कैसे होती है ट्रेनिंग?

  • सेंटर में छात्राओं को कानूनी अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाती है।

  • उनकी निजी और पारिवारिक समस्याओं की काउंसलिंग की जाती है।

  • महीने में दो शनिवार को विशेष सत्र आयोजित होते हैं।

  • काउंसलिंग टीम में मनोविज्ञानी, समाजशास्त्री और महिला आयोग की पूर्व सदस्य भी शामिल हैं।

अब तक आए 150 से ज्यादा केस

अप्रैल में शुरू हुए इस सेंटर में अब तक 150 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। हर केस में काउंसलिंग के जरिए समाधान निकाला गया है। कई मामलों में परिवार वालों को भी बुलाकर समझाया गया।

सामने आए कुछ दिलचस्प केस

  • केस 1: बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ने बताया कि परिवार ने शादी तय कर दी थी और उसे परीक्षा देने से रोका जा रहा था। काउंसलिंग के बाद परिवार मान गया और अब वह पढ़ाई कर रही है।

  • केस 2: बीए प्रथम वर्ष की छात्रा का ससुराल उसकी पढ़ाई बंद कराना चाहता था। वह डिप्रेशन में चली गई थी। काउंसलिंग के बाद अब वह खुशी-खुशी पढ़ाई जारी रख रही है।

  • केस 3: बीकाम द्वितीय वर्ष की छात्रा ने मां को खो दिया था और पिता पहले ही गुजर चुके थे। वह अवसाद में चली गई थी। काउंसलिंग के बाद अब अच्छे अंक ला रही है।

प्राचार्य का बयान

कॉलेज की प्राचार्य डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव का कहना है—
“इस सेंटर का उद्देश्य छात्राओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियों से निपट सकें। यहां उन्हें पारिवारिक मूल्यों, संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना सिखाया जाता है, साथ ही कानूनी अधिकारों की जानकारी भी दी जाती है।”

लेखक

  • Nalini Mishra

    नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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नलिनी मिश्रा

नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञतानलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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