आज के दौर में फिट रहना एक बड़ी चुनौती बन गया है। हम जिम जाते हैं, अच्छी डाइट लेते हैं, लेकिन अक्सर एक चीज़ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं—वह है हमारे किचन में रखा कुकिंग ऑयल। क्या आप जानते हैं कि गलत तेल का चुनाव आपके दिल की धड़कनों को खतरे में डाल सकता है? बाज़ार में मौजूद ढेरों विकल्पों के बीच यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर कौन सा तेल सेहत के लिए सबसे अच्छा है। आइए, एक्सपर्ट्स की नज़र से जानते हैं पूरी सच्चाई।
स्मोक पॉइंट का खेल: क्यों हर तेल तलने के लिए नहीं होता?
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि हर तेल का एक ‘स्मोक पॉइंट’ (Smoke Point) होता है। यह वह तापमान है जिस पर तेल जलने लगता है और उसमें से धुआं निकलने लगता है। अगर तेल अपने स्मोक पॉइंट से ज़्यादा गरम हो जाए, तो वह ज़हरीला हो सकता है।
भारतीय कुकिंग (Deep Frying): भारतीय खाने में तलने-भूनने का काम ज़्यादा होता है, इसलिए हमें उच्च स्मोक पॉइंट वाले तेल की ज़रूरत होती है।
1. सरसों का तेल (Mustard Oil): भारतीय घरों की पहली पसंद
उत्तर भारत के घरों में दशकों से सरसों के तेल का राज रहा है। आयुर्वेद में भी इसे औषधि माना गया है। इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का सही संतुलन होता है। इसका स्मोक पॉइंट बहुत अधिक होता है, इसलिए यह तलने और तड़का लगाने के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में भी मदद करता है।
2. जैतून का तेल (Olive Oil): कितना सच, कितना झूठ?
आजकल फिटनेस फ्रीक्स के बीच ‘एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल’ काफी लोकप्रिय है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हार्ट के लिए बेहतरीन है, लेकिन इसे भारतीय स्टाइल की तेज़ आंच वाली कुकिंग या डीप फ्राइंग के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसका स्मोक पॉइंट कम होता है। इसे सलाद की ड्रेसिंग या धीमी आंच पर पकाने के लिए ही रखें।
3. मूंगफली का तेल (Groundnut Oil)
मूंगफली का तेल विटामिन-ई और गुड फैट्स से भरपूर होता है। इसका स्वाद भी अच्छा होता है और स्मोक पॉइंट भी ज़्यादा। अगर आप पूरी या पकौड़े बना रहे हैं, तो मूंगफली का तेल एक स्वस्थ विकल्प हो सकता है।
4. राइस ब्रान ऑयल (Rice Bran Oil)
हाल के वर्षों में राइस ब्रान ऑयल ने बाज़ार में तेज़ी से जगह बनाई है। यह धान की भूसी से निकाला जाता है। इसमें ‘ओरिज़ानॉल’ नामक तत्व होता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है। इसका न्यूट्रल स्वाद इसे हर तरह की डिश के लिए फिट बनाता है।
रिफाइंड ऑयल से दूरी क्यों है ज़रूरी?
बाज़ार में मिलने वाले पैकेट बंद रिफाइंड तेल अक्सर केमिकल प्रोसेस से गुज़रते हैं। हाई हीट पर प्रोसेसिंग के दौरान इनके प्राकृतिक गुण खत्म हो जाते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि ‘कोल्ड प्रेस्ड’ (Kachi Ghani) यानी कच्ची घानी के तेल का इस्तेमाल ज़्यादा फायदेमंद है।
एक्सपर्ट की राय: क्या है सबसे बेस्ट?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी एक तेल पर निर्भर रहने के बजाय ‘ऑयल रोटेशन’ की तकनीक अपनानी चाहिए। यानी एक महीना सरसों का तेल इस्तेमाल करें, तो दूसरे महीने मूंगफली या राइस ब्रान ऑयल। इससे शरीर को सभी ज़रूरी फैटी एसिड्स मिल जाते हैं।
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