“मेरी बच्ची ने लंच भी नहीं किया था, उसे मार डाला…”, बांग्लादेश में 13 साल की मासूम अलिफ़ा की रूह कंपा देने वाली कहानी

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बांग्लादेश में जारी हिंसा और अशांति के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यह कहानी 13 साल की एक मासूम बच्ची अलिफ़ा की है, जिसके छोटे-छोटे सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया। उसकी मां नसीमा का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार बस एक ही बात कह रही हैं— “मेरी बच्ची ने तो दोपहर का खाना भी नहीं खाया था, उसे क्यों मार डाला?”

एक अधूरा लंच और कभी न खत्म होने वाला इंतजार

उस दिन नसीमा के घर के चूल्हे पर चावल पक रहे थे। खाना तैयार होने में थोड़ा वक्त था, इसलिए नसीमा ने अपनी बड़ी बेटी अलिफ़ा को एक प्लास्टिक बैग देकर पड़ोस के घर एक छोटा सा काम करने भेजा। नसीमा दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर अपना घर चलाती हैं। उन्हें उम्मीद थी कि अलिफ़ा बस अभी लौट आएगी और फिर दोनों साथ बैठकर गर्म चावल खाएंगे। लेकिन अलिफ़ा कभी वापस नहीं आई।

रात भर भटकते रहे पिता, सुबह मिली लाश

जब शाम तक अलिफ़ा घर नहीं लौटी, तो उसके पिता मोहम्मद अली, जो एक रिक्शा चालक हैं, पागलों की तरह उसे ढूंढने लगे। पूरी रात उन्होंने शहर की खाक छानी, मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर ऐलान करवाए, लेकिन अलिफ़ा का कहीं पता नहीं चला। अगली सुबह फज्र की नमाज के बाद पड़ोस के एक घर के सामने अलिफ़ा की लाश मिली। मासूम का शरीर उसके अपने घर के ठीक पीछे पड़ा था।

पुलिस और डॉक्टरों का चौंकाने वाला खुलासा

बंदर पुलिस स्टेशन के अधिकारी गुलाम मुख्तार अशरफ के मुताबिक, अलिफ़ा के शरीर पर क्रूरता के निशान थे। शुरुआती जांच में पुलिस को शक है कि हत्या से पहले बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) किया गया था। नारायणगंज जनरल हॉस्पिटल के डॉक्टर जहिरुल इस्लाम ने बताया कि बच्ची के गालों और गर्दन पर नाखूनों के निशान मिले हैं। रेप की पुष्टि के लिए सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

ड्रग्स का आतंक और पंचायत की लाचारी

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। पूर्व पार्षद शेउली नौशाद का कहना है कि इलाके में ड्रग्स का कारोबार खुलेआम चल रहा है। नशेड़ी और अपराधी बेखौफ घूमते हैं। उन्होंने कई बार पंचायत के साथ मीटिंग की, लेकिन अपराधियों ने उल्टा उन्हें ही डराने की कोशिश की। लोगों का मानना है कि किसी नशेड़ी ने ही इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया है। इलाके में CCTV कैमरों की कमी की वजह से अपराधियों को पकड़ने में भी मुश्किल आ रही है।

नतीजों का इंतजार कर रही थी अलिफ़ा

अलिफ़ा पांचवीं क्लास की छात्रा थी। उसने अभी हाल ही में अपने सालाना इम्तिहान दिए थे और 30 दिसंबर को उसके नतीजे आने वाले थे। उसकी ट्यूटर सुल्ताना रज़िया भावुक होते हुए कहती हैं कि वह एक होनहार बच्ची थी। जिस घर में खुशियों का माहौल होना चाहिए था, वहां आज मातम पसरा है। नसीमा अब बस एक ही मांग कर रही हैं— “मेरी बच्ची के हत्यारे को मौत की सजा मिले।”

बांग्लादेश में पिछले हफ्ते हुई हिंसा ने कई बेगुनाहों की जान ली है, लेकिन अलिफ़ा जैसी मासूमों के साथ जो हो रहा है, उसने समाज के माथे पर कलंक लगा दिया है। पुलिस ने फिलहाल हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और एक पड़ोसी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

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लेखक

  • चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

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