ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में हालात एक बार फिर बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। छात्र नेता उस्मान हादी की मौत ने पूरे देश में गुस्से की आग लगा दी है, जिसका असर अब सड़कों पर साफ देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का यह गुस्सा न केवल स्थानीय संस्थानों, बल्कि मीडिया और भारत के खिलाफ भी निकलता दिख रहा है।
उस्मान हादी की मौत और ढाका में बवाल
बता दें कि पिछले साल शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए बड़े छात्र आंदोलन में ‘इंकलाब मंच’ के उस्मान हादी ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई थी। पिछले हफ्ते उन्हें अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हादी ने इस गुरुवार को दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका की सड़कों पर छात्र और प्रदर्शनकारी उतर आए।
देखते ही देखते यह विरोध हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने ढाका के दो प्रमुख समाचार पत्रों, ‘प्रथम आलो’ (Prothom Alo) और ‘डेली स्टार’ (Daily Star) के दफ्तरों को निशाना बनाया। गुस्साए लोगों ने वहां जमकर तोड़फोड़ की और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया।
भारतीय उच्चायोग पर हमला और मुजीब-उर रहमान का घर निशाने पर
हैरानी की बात यह है कि इस हिंसा का रुख भारत की ओर भी मुड़ गया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर जमा हुए और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान उच्चायोग परिसर पर पत्थरबाजी भी की गई, जिससे तनाव काफी बढ़ गया है।
इतना ही नहीं, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीब-उर रहमान के घर और सांस्कृतिक केंद्र ‘छायानौत’ को भी एक बार फिर से भीड़ ने निशाना बनाया। उपद्रवियों ने वहां काफी नुकसान पहुँचाया है।
हिंदू युवक की हत्या से सनसनी
हिंसा की इन खबरों के बीच गुरुवार को एक और दुखद घटना सामने आई। एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। शुक्रवार को यह खबर भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद सुरक्षा और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
जमात-ए-इस्लामी ने क्या कहा?
इस संवेदनशील मामले पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को समर्थन दे रही जमात-ए-इस्लामी का बड़ा बयान आया है। संगठन ने हिंदू युवक की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है। जमात-ए-इस्लामी ने अंतरिम सरकार से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जो भी अपराधी हैं, उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए।
फिलहाल बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उस्मान हादी की मौत ने जिस तरह से जनभावनाओं को भड़काया है, उसने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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