ढाका: बांग्लादेश में मचे सियासी घमासान के बीच राजधानी ढाका की तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। शनिवार को छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को भारी सुरक्षा और गमगीन माहौल के बीच सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। लेकिन यह सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि सत्ता के गलियारों को हिला देने वाली एक चेतावनी थी। एक तरफ अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस हादी की तारीफों के पुल बांध रहे थे, तो दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों ने सरकार को हिलाकर रख देने वाला 24 घंटे का अल्टीमेटम थमा दिया है।
संसद से यूनिवर्सिटी तक ‘इंकलाब’ की गूंज
हादी का अंतिम सफर किसी ऐतिहासिक आंदोलन जैसा नजर आया। संसद के दक्षिणी प्लाजा पर नमाज-ए-जनाजा अदा की गई, जहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी। लाखों की संख्या में पहुंचे छात्रों और आम नागरिकों की आंखों में आंसू तो थे, लेकिन सीने में गुस्सा भी था। ढाका यूनिवर्सिटी, जो हालिया विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रही है, वहां का माहौल अब भी बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।
मोहम्मद यूनुस ने क्या कहा?
जनाजे में पहुंचे अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने शरीफ उस्मान हादी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साहस को याद किया। उन्होंने कहा कि हादी जैसे युवाओं ने देश के लिए जो किया है, उसे भुलाया नहीं जा सकता। हालांकि, यूनुस की मौजूदगी के बावजूद भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। मंच से ही सरकार को सख्त संदेश दिया गया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले लेगा।
24 घंटे का वो अल्टीमेटम, जिसने बढ़ाई हलचल
खबरों के मुताबिक, प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि 24 घंटे के भीतर ठोस कदम उठाए जाएं, वरना पूरे देश में एक बार फिर ‘चक्का जाम’ की स्थिति पैदा हो जाएगी। उनकी मांगें क्या हैं और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
तनाव में ढाका, छावनी बना कैंपस
हादी को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के बाद ढाका यूनिवर्सिटी और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादी की मौत ने छात्रों को एकजुट कर दिया है और अब यह मामला सिर्फ एक छात्र नेता की मौत का नहीं, बल्कि स्वाभिमान की लड़ाई बन गया है।
सरकार के लिए आने वाले कुछ घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। क्या मोहम्मद यूनुस की शांति की अपील काम आएगी या अल्टीमेटम के बाद बांग्लादेश में फिर से प्रदर्शनों का नया दौर शुरू होगा? यह देखना बाकी है।
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