ढाका: बांग्लादेश की राजनीति इस वक्त एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। हिंसा, तख्तापलट और कट्टरपंथियों के साये के बीच एक नए चेहरे ने सबकी निगाहें अपनी ओर खींच ली हैं। इस ‘मिस्ट्री गर्ल’ की एंट्री ने न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि पड़ोसी देशों के सियासी गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। यह चेहरा कोई और नहीं, बल्कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन खालिदा जिया की पोती और तारिक रहमान की बेटी जाइमा रहमान हैं।
17 साल बाद पिता के साथ वतन वापसी
करीब 17 साल तक लंदन में रहने के बाद जाइमा रहमान हाल ही में अपने पिता तारिक रहमान के साथ बांग्लादेश लौटी हैं। उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश अपनी तकदीर बदलने की कोशिश कर रहा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौर में जहाँ एक तरफ अराजकता का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ बीएनपी अब चुनाव के जरिए सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही है। जाइमा भले ही दुनिया के लिए नया नाम हों, लेकिन बांग्लादेश की अवाम उन्हें ‘भविष्य की नेता’ के तौर पर देख रही है।
कौन हैं जाइमा रहमान? (Zaima Rahman Profile)
जाइमा रहमान बीएनपी नेता तारिक रहमान की इकलौती बेटी हैं। उनके दादा जिआउर रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति थे और दादी खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री। जाइमा पेशे से एक बैरिस्टर (वकील) हैं और उन्होंने अपनी शिक्षा लंदन में पूरी की है। हालांकि उन्होंने अब तक आधिकारिक तौर पर कोई चुनाव नहीं लड़ा है और न ही पार्टी में कोई पद संभाला है, लेकिन उनकी सक्रियता कुछ और ही इशारा कर रही है।
क्यों कहा जा रहा है ‘फ्यूचर की शेख हसीना या खालिदा जिया’?
सोशल मीडिया पर जाइमा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। लोग उन्हें बांग्लादेश की अगली ताकतवर महिला नेता के रूप में देख रहे हैं। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:
युवा चेहरा: बांग्लादेश की ‘जेन-जी’ (Gen-Z) यानी युवा पीढ़ी बदलाव चाहती है। जाइमा पढ़ी-लिखी, आधुनिक और युवा हैं, जो युवाओं से आसानी से कनेक्ट कर सकती हैं।
राजनीतिक विरासत: उनकी रगों में बांग्लादेश के दो सबसे बड़े राजनीतिक परिवारों का खून है।
साफ छवि: जहाँ बीएनपी के पुराने नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वहीं जाइमा की छवि अब तक बिल्कुल साफ है।
दादी से खास लगाव और सियासत की झलक
जाइमा ने हाल ही में फेसबुक पर अपनी दादी खालिदा जिया के साथ बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे 6 साल की उम्र में वह अपनी दादी के साथ वोट डालने गई थीं। 11 साल की उम्र में जब उन्होंने फुटबॉल टूर्नामेंट जीता, तो सबसे पहले अपनी दादी को मेडल दिखाने पहुंची थीं। जाइमा का कहना है कि वह अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलतीं और अब देश के लिए “बड़ा रोल” निभाने को तैयार हैं।
विवादों से बढ़ी लोकप्रियता
जाइमा पहली बार 2021 में तब चर्चा में आईं जब अवामी लीग के तत्कालीन मंत्री मुराद हसन ने उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। उस वक्त पूरे देश में इसका विरोध हुआ और मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद से ही जाइमा को लेकर लोगों में सहानुभूति और समर्थन बढ़ा।
क्या 2026 के चुनाव में दिखेगा जाइमा का जलवा?
बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव होने की संभावना है। तारिक रहमान खुद को एक नई छवि में पेश कर रहे हैं और जाइमा को अपने ‘उत्तराधिकारी’ के तौर पर आगे बढ़ा सकते हैं। हाल ही में उन्होंने वाशिंगटन में ‘नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट’ और ढाका में यूरोपीय प्रतिनिधियों के साथ बीएनपी की बैठकों में हिस्सा लेकर अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है।
फिलहाल, जाइमा ने चुनाव लड़ने का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन उनकी हर पोस्ट और हर कदम यह बता रहा है कि वह बांग्लादेश को “री-बिल्ड” (दोबारा बनाने) के मिशन पर निकल चुकी हैं। क्या वह अपनी दादी खालिदा जिया की विरासत को आगे ले जा पाएंगी? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बांग्लादेश की सियासत में ‘जाइमा फैक्टर’ अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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