‘अवामी लीग से बैन हटाओ वरना…’, अमेरिका ने यूनुस को दिया तगड़ा झटका, क्या शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी का रास्ता साफ?

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नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। एक तरफ मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार चुनाव की तैयारियों में जुटी है, तो दूसरी तरफ दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका ने यूनुस को ऐसा झटका दिया है जिससे ढाका से लेकर दिल्ली तक हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी सांसदों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि अगर किसी बड़ी पार्टी को चुनाव से बाहर रखा गया, तो यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा होगा।

अमेरिका की दोटूक: अवामी लीग के बिना चुनाव मंजूर नहीं

बांग्लादेश में फरवरी में आम चुनाव होने की चर्चा है, लेकिन उससे पहले अंतरराष्ट्रीय दबाव ने यूनुस सरकार की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी डब्ल्यू मीक्स, बिल हुईजेंगा और सिडनी कैमलागर-डोव ने मुहम्मद यूनुस को एक कड़ा पत्र भेजा है।

इस पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि किसी पूरी राजनीतिक पार्टी (अवामी लीग) पर प्रतिबंध लगाना लाखों मतदाताओं के अधिकारों का हनन है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगर अवामी लीग जैसी बड़ी पार्टी चुनाव मैदान में नहीं होगी, तो उस चुनाव को ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ कतई नहीं माना जा सकता।

क्या यूनुस बन रहे हैं तानाशाह?

जुलाई में हुए हिंसक विद्रोह के बाद सत्ता में आई यूनुस सरकार ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग और उसकी छात्र इकाई ‘छात्र लीग’ पर पाबंदी लगा रखी है। सांसदों ने यूनुस को याद दिलाया कि किसी पार्टी को सामूहिक रूप से दोषी ठहराना मानवाधिकारों के खिलाफ है। अगर किसी ने अपराध किया है, तो जिम्मेदारी व्यक्तिगत होनी चाहिए, न कि पूरे संगठन पर प्रतिबंध लगाकर करोड़ों समर्थकों को चुप कर देना चाहिए।

सांसदों ने ‘इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल’ (ICT) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह से पुराने स्वरूप में इसे शुरू किया गया है, उससे चुनावी प्रक्रिया की साख गिर सकती है।

फोन पर हुई थी लंबी बातचीत, फिर भी नहीं बनी बात

हैरानी की बात यह है कि यह पत्र तब आया है जब हाल ही में मोहम्मद यूनुस ने अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर से फोन पर लंबी चर्चा की थी। इस बातचीत में व्यापार, टैरिफ और लोकतांत्रिक बदलाव पर बात हुई थी। यूनुस ने भरोसा दिलाया था कि 12 फरवरी को होने वाले चुनाव पूरी तरह पारदर्शी होंगे। लेकिन अमेरिकी सांसदों का यह रुख बताता है कि वे फिलहाल यूनुस की बातों से संतुष्ट नहीं हैं।

शेख हसीना का तीखा हमला: “यह चुनाव नहीं, राजतिलक है”

अपनी सत्ता गंवाने के बाद पहली बार शेख हसीना ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। 22 दिसंबर को अपने बयान में उन्होंने कहा कि “अवामी लीग के बिना चुनाव, चुनाव नहीं बल्कि ‘राजतिलक’ होगा।” हसीना ने चेतावनी दी कि यदि उनकी पार्टी पर बैन रहा, तो देश की एक बड़ी आबादी मतदान का बहिष्कार करेगी और ऐसी सरकार के पास कोई नैतिक ताकत नहीं होगी।

हसीना ने देश में बढ़ती हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के लिए सीधे तौर पर यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सहित तमाम पड़ोसी देश बांग्लादेश की इस अराजकता को बड़ी चिंता के साथ देख रहे हैं।

क्या फिर पलटेगी बांग्लादेश की किस्मत?

यूनुस सरकार का आरोप है कि हसीना के समर्थक करोड़ों रुपये खर्च कर चुनाव में बाधा डाल रहे हैं और विदेश से हिंसा भड़काई जा रही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव, खासकर अमेरिका के रुख ने अब पासा पलट दिया है। अगर अवामी लीग से बैन हटता है, तो शेख हसीना की वापसी की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। अब देखना यह होगा कि मोहम्मद यूनुस अमेरिका की इस ‘चेतावनी’ को किस तरह लेते हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

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  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
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