पश्चिम बंगाल में इन दिनों राजनीति एक बार फिर उफान पर है। वजह है—बाबरी मस्जिद को लेकर तृणमूल कांग्रेस के निलंबित नेता हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान। उन्होंने 6 दिसंबर 2025 को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने की घोषणा कर दी है। इस बयान के बाद पूरे राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया। इसी विवाद को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन अदालत ने साफ कहा कि वह इस मामले में दखल नहीं देगी।
दरअसल, 6 दिसंबर भारत की राजनीति में एक बेहद संवेदनशील तारीख है। इसी दिन 1992 में अयोध्या का विवादित ढांचा गिराया गया था। ऐसे में हुमायूं कबीर द्वारा ठीक इसी तारीख को मस्जिद का शिलान्यास करने का ऐलान विपक्षी दलों ने सियासी चाल बताया है। विवाद बढ़ा तो TMC ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद हुमायूं कबीर ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है।
कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख
हुमायूं कबीर के बयान और प्रस्तावित कार्यक्रम के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी। अंतरिम मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की और कहा कि यह राज्य सरकार का विषय है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा—
“कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा।”
कोर्ट के इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि प्रशासन पर ही पूरे मामले को संभालने की जिम्मेदारी रहेगी। राज्य में शांति बनाए रखने और किसी भी संभावित तनाव को रोकने के लिए सरकार को पूरी ताकत लगानी होगी।
हुमायूं कबीर का दावा—‘यह मेरा संवैधानिक अधिकार’
हाईकोर्ट के फैसले के बाद हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह अदालत के निर्णय से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है कि वे किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण का प्रस्ताव रखें और उसे आगे बढ़ाएं।
उन्होंने फिर दोहराया कि वे शनिवार दोपहर 12 बजे मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करेंगे। इस कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के कई प्रभावशाली नेता भी मौजूद रहेंगे।
हुमायूं कबीर का कहना है कि उनका मकसद किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं है, बल्कि समुदाय के लिए एक धार्मिक स्थल का निर्माण करना है। हालांकि विपक्ष तथा कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस कदम से बंगाल में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।
TMC का हुमायूं कबीर से किनारा
तृणमूल कांग्रेस ने हुमायूं कबीर की घोषणा को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। TMC नेताओं का कहना है कि पार्टी किसी ऐसी गतिविधि का समर्थन नहीं कर सकती जिससे राज्य में अशांति फैलने की संभावना हो।
पार्टी से बाहर किए जाने के बाद हुमायूं कबीर ने सीधे ममता सरकार पर हमला बोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC अब अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर संवेदनशील नहीं रही और वह उनके अधिकारों के बारे में बोलने वालों को चुप कराना चाहती है।
उनके इन आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और भी गर्म कर दिया है। BJP समेत अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर TMC को निशाने पर ले रहे हैं।
राज्य में बढ़ी सुरक्षा, प्रशासन अलर्ट
हालांकि अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यह मामला राज्य सरकार का है, इसलिए बंगाल सरकार ने मुर्शिदाबाद और आस-पास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। खुफिया एजेंसियां संभावित भीड़, विरोध प्रदर्शन और कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा जोखिमों को लेकर सजग हैं।
अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की सांप्रदायिक घटना को रोका जा सके।
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