अयोध्या में आज वह पल आया जिसका इंतज़ार करोड़ों श्रद्धालुओं को था — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के 161 फुट ऊँचे शिखर पर केसरिया धर्मध्वज फहराया। इस ऐतिहासिक ध्वजारोहरण के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और अनेक संत-श्रद्धालु मौजूद थे; पूरा परिसर जय श्रीराम के नारों से गूँज उठा।
प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह में कहा कि आज सदियों के घाव भर रहे हैं और यह क्षण देश और विश्व के लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि राम विनम्रता और मर्यादा के प्रतीक हैं तथा हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। मोदी ने यह भी कहा कि यह समय हमारी अस्मिता की वापसी का है और हमें गुलामी की मानसिकता से मुक्त होना होगा।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस अवसर को सनातन संस्कृति की विजय बताया और कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था आज साकार हुई है। भागवत ने यह भी कहा कि यह ध्वजा सिर्फ एक ध्वज नहीं, बल्कि रामराज्य के आदर्शों का प्रतीक है जिसे शिखर तक लेकर जाना है। उनके शब्दों में, यह वर्षो के संघर्ष का परिणाम है और मंदिर कल्पना से भी अधिक सुंदर बना है।
ध्वजारोहरण से पहले प्रधानमंत्री ने सप्तमंदिरों और शेषावतार मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की; उन्होंने माता अन्नपूर्णा के मंदिर में भी श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इसके बाद रोड शो और सार्वजनिक स्वागत के बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त में मंदिर के शिखर पर 22 फुट लंबी और 11 फुट चौड़ी केसरिया ध्वजा आरोहित की गई। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन मंदिर के नागरिक निर्माण के पूर्ण होने और उसकी आध्यात्मिक परंपरा को समर्पित है।
कार्यक्रम के दौरान भव्य मंगल-स्वस्ति गान का आयोजन भी किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा भजन, स्तोत्र और श्रीरामचरितमानस के प्रसंगों का गायन शामिल था। इस सांस्कृतिक-आध्यात्मिक प्रस्तुतिकरण का संयोजन साहित्यकार यतीन्द्र मिश्र द्वारा किया गया था ताकि ध्वजारोहरण की आध्यात्मिक आभा और भी गहरी हो सके।
अयोध्या के बाहर और भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे — रोड शो के मार्ग पर भारी सुरक्षा बल तैनात थे, ड्रोन और तकनीकी निगरानी के साथ व्यापक ट्रैफिक प्रबंध भी किये गए। आयोजकों ने लगभग 6,000 आमंत्रित अतिथियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के लिए व्यवस्थाएँ कीं। स्थानीय प्रशासन ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिये 2.5 किमी तक के क्षेत्र को नियंत्रित कर रखा था।
ध्वजारोहरण का क्षण कई मायनों में प्रतीकात्मक था — मंदिर के शिखर पर ध्वजा फहरने से यह संकेत मिलता है कि नागरिक निर्माण का बड़ा काम पूरा हुआ है और मंदिर अब पूर्णता की ओर अग्रसर है। वहीं कई राजनीतिक और सामाजिक पक्ष इस घटना के महत्व और उसके प्रभावों पर विभिन्न मत रखते हैं; कुछ ने इसे आस्था का उत्सव माना तो कुछ ने संवैधानिक विमर्श की ओर ध्यान आकृष्ट किया। समाचार-अपडेट्स के दौरान सत्ता एवं विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आईं, जिनकी चर्चाएँ जारी रहीं।
अंततः आज का दिन न केवल अयोध्या के लिए बल्कि उन लोगों के लिए भी ऐतिहासिक रहेगा जिन्होंने दशकों से इस क्षण का इंतजार किया। ध्वजारोहरण का यह दृश्य श्रद्धा, संस्कृति और राजनीति के संगम के रूप में लंबे समय तक याद रखा जाएगा — और राम मंदिर का यह नया अध्याय अब देश की आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक कहानियों में एक प्रमुख पन्ना जोड़ चुका है।
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