महाराष्ट्र के नासिक से शुरू हुआ कैप्टन अशोक खरात का मामला अब महज एक स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि एक ऐसे गहरे और वीभत्स ‘क्राइम सिंडिकेट’ की कहानी बन चुका है जिसने राज्य की सियासत और सामाजिक ढांचे को झकझोर कर रख दिया है। जिसे समाज एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक और अंकशास्त्र (Numerology) का विशेषज्ञ मानकर पूज रहा था, वह असल में अपनी रसूखदार पहचान की आड़ में महिलाओं का यौन शोषण और अकूत संपत्ति का अंबार खड़ा कर रहा था। विपक्ष ने इस मामले की तुलना वैश्विक स्तर पर चर्चित ‘एपस्टीन फाइल्स’ से की है, जिसने इस प्रकरण की गंभीरता को कई गुना बढ़ा दिया है।
रसूख, रुतबा और ढोंग का मायाजाल
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अशोक खरात की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है, लेकिन इसके परिणाम अत्यंत विनाशकारी हैं। मर्चेंट नेवी का रिटायर्ड अधिकारी होने के नाते उसने खुद को ‘कैप्टन’ के रूप में स्थापित किया। यह पदवी उसे समाज में तात्कालिक विश्वसनीयता प्रदान करती थी। नेवी से सेवानिवृत्त होने के बाद उसने ज्योतिष और अंकशास्त्र को अपना हथियार बनाया। खरात ने केवल साधारण लोगों को ही नहीं, बल्कि बड़े राजनेताओं, नौकरशाहों और मशहूर हस्तियों को भी अपने प्रभाव में ले रखा था। उसकी वेबसाइट के दावे बताते हैं कि उसने 150 से अधिक देशों की यात्रा की थी, जिसका उपयोग वह लोगों को यह समझाने के लिए करता था कि उसके पास ‘दैवीय शक्तियां’ और वैश्विक आध्यात्मिक ज्ञान है।
काली कमाई का विशाल साम्राज्य
जब अपराध शाखा (Crime Branch) ने नासिक और सिन्नर स्थित खरात के ठिकानों पर छापेमारी की, तो जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था। जांच अधिकारियों के अनुसार, खरात की कुल संपत्ति 200 करोड़ रुपये से भी अधिक होने का अनुमान है। उसके पास ऑडी और फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियों का काफिला, नासिक के प्राइम लोकेशंस पर आलीशान बंगले, और सिन्नर के मीरगांव में एक भव्य फार्महाउस मिला है।
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हैरानी की बात यह है कि उसने मीरगांव में ‘श्री ईशान्येश्वर मंदिर’ का निर्माण जाम नदी के पात्र (Riverbed) में अवैध रूप से किया था। मंदिर के पास एक विशेष बांध भी बनाया गया था ताकि बाढ़ का पानी मंदिर को नुकसान न पहुँचा सके। यह अतिक्रमण खरात के उस रसूख को दर्शाता है, जिसके आगे प्रशासन सालों तक मौन रहा। छापे के दौरान पुलिस को खरात के फार्महाउस से एक पिस्तौल और जिंदा कारतूस भी मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि वह केवल आध्यात्मिक भय ही नहीं, बल्कि बाहुबल का भी उपयोग करता था।
आस्था की आड़ में शोषण का ‘मोडस ऑपेरंडी’
खरात के खिलाफ दर्ज एफआईआर में जो खुलासे हुए हैं, वे रूह कंपा देने वाले हैं। वह महिलाओं को उनकी समस्याओं के समाधान के नाम पर अपने दफ्तर बुलाता था। वहां उन्हें ‘प्रसाद’ के नाम पर नशीला पदार्थ मिश्रित पानी पिलाया जाता था। जब पीड़िता सुध-बुध खो बैठती, तो वह उनके साथ घिनौनी हरकतें करता और आपत्तिजनक वीडियो बना लेता था। पुलिस को एक पेनड्राइव मिली है जिसमें 58 ऐसे वीडियो हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह शोषण का एक व्यवस्थित जाल था।
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खरात ने डर को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया था। वह पीड़ित महिलाओं को डराता था कि यदि उन्होंने किसी को बताया, तो उनके पति की मृत्यु हो जाएगी या उनके परिवार पर दैवीय प्रकोप बरपेगा। अंधविश्वास और डर के इसी कॉकटेल ने उसे सालों तक कानून की नजरों से बचाए रखा।
राजनीतिक भूचाल और SIT की जांच
इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में भी जबरदस्त उबाल पैदा कर दिया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का नाम खरात के मंदिर ट्रस्ट से जुड़े होने के कारण विवादों में है। विपक्ष की नेता सुषमा अंधारे और सांसद संजय राउत ने इसे ‘महाराष्ट्र का एपस्टीन केस’ बताते हुए सरकार को घेरा है। राउत का दावा है कि इन 58 वीडियो में कई प्रभावशाली चेहरों की संलिप्तता हो सकती है, जिससे सरकार की नींव हिल सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसकी कमान तेजस्विनी सातपुते (IPS) को सौंपी गई है। एसआईटी अब न केवल यौन शोषण के मामलों की जांच कर रही है, बल्कि खरात की आय के स्रोतों, अवैध संपत्तियों और उसके राजनीतिक संपर्कों की भी गहराई से पड़ताल कर रही है। खरात वर्तमान में 24 मार्च तक पुलिस हिरासत में है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
सामाजिक विश्लेषण: रसूख और अंधविश्वास का गठजोड़
कैप्टन अशोक खरात का मामला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे उच्च शिक्षित और रसूखदार लोग भी अंधविश्वास की आड़ में अपराधियों के शिकार बन जाते हैं। खरात ने ‘कैप्टन’ की पदवी और अंग्रेजी बोलने की अपनी कला का इस्तेमाल एक ऐसे मुखौटे के रूप में किया, जिसने समाज के प्रबुद्ध वर्ग की तार्किक क्षमता को सुला दिया। यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति के अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवालिया निशान है जिसने एक नदी के पात्र में अवैध निर्माण और वर्षों से चल रहे इस शोषण के साम्राज्य को पनपने दिया।
जैसे-जैसे एसआईटी की जांच आगे बढ़ रही है, खरात के आलीशान फार्महाउसों और गुप्त दस्तावेजों से नए राज बाहर आ रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कानून इन 58 वीडियो के पीछे छिपे गुनहगारों और खरात के ‘गॉडफादर्स’ तक पहुँच पाता है या नहीं।
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