बॉलीवुड में जब भी किसी ऐसे सितारे का नाम लिया जाता है जिसकी उम्र थमती ही नहीं, तो सबसे पहला नाम अनिल कपूर का आता है। अपनी बेमिसाल एनर्जी, जबरदस्त फिटनेस और ‘झक्कास’ अंदाज से उन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। लेकिन आज करोड़ों के बंगले में रहने वाले इस सुपरस्टार का शुरुआती सफर इतना आसान नहीं था।
अनिल कपूर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जिसमें गरीबी, संघर्ष और फिर आसमान छूती कामयाबी के सभी रंग मौजूद हैं।
राज कपूर के गैराज में बिताए शुरुआती दिन
अनिल कपूर का जन्म 24 दिसंबर 1956 को मुंबई के चेम्बूर इलाके में हुआ था। वह मशहूर फिल्म निर्माता सुरेंद्र कपूर और निर्मल कपूर के बेटे हैं। भले ही वह एक फिल्मी परिवार से थे, लेकिन उनके पिता के संघर्ष के दिनों में परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी।
जब उनका परिवार मुंबई आया, तो रहने के लिए जगह की भारी किल्लत थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि अनिल कपूर ने अपने जीवन के शुरुआती दिन शोमैन राज कपूर के गैराज में बने एक छोटे से कमरे में बिताए थे। उस छोटे से कमरे में रहते हुए और तंगी झेलते हुए भी अनिल ने कभी बड़े सपने देखना नहीं छोड़ा। यही संघर्ष आगे चलकर उनके करियर की मजबूत नींव बना।
12 साल की उम्र में पहली बार दिखे पर्दे पर
अनिल कपूर ने बहुत कम उम्र में ही समझ लिया था कि उन्हें एक्टर ही बनना है। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार कैमरा फेस किया। साल 1979 में आई हिंदी फिल्म ‘हमारे-तुम्हारे’ में उन्होंने एक छोटा सा रोल निभाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बतौर लीड हीरो उनकी पहली फिल्म हिंदी नहीं बल्कि तेलुगू थी? 1980 में आई फिल्म ‘वामसा वृक्षम’ से उन्होंने मुख्य अभिनेता के तौर पर शुरुआत की। बॉलीवुड में उन्हें असली पहचान 1983 की फिल्म ‘वो सात दिन’ से मिली, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सेट पर ‘शरारती’ मिस्टर इंडिया
अनिल कपूर अपनी गंभीर एक्टिंग के साथ-साथ सेट पर अपनी मस्ती और शरारतों के लिए भी मशहूर हैं। ‘मिस्टर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान वह अक्सर क्रू मेंबर्स और को-स्टार्स को डराया करते थे। कभी कैमरे के पीछे से अजीब आवाजें निकालना तो कभी अचानक किसी के पीछे आकर चिल्ला देना—उनका यह मजाकिया अंदाज पूरे सेट का माहौल खुशनुमा रखता था। ‘राम लखन’ के गानों की शूटिंग के दौरान तो वह अक्सर खुद ही हंस पड़ते थे, जिससे पूरी यूनिट हंसी में डूब जाती थी।
बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर
अनिल कपूर के करियर का ग्राफ ‘मशाल’ (1984) के बाद तेजी से ऊपर गया। इसके बाद उन्होंने ‘तेजाब’, ‘राम लखन’, ‘परिंदा’ और ‘मेरी जंग’ जैसी एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दीं। 90 के दशक में भी उन्होंने ‘जुदाई’ और ‘बीवी नंबर 1’ जैसी फिल्मों से अपनी धाक जमाए रखी।
उनकी कामयाबी केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं रही। डैनी बॉयल की ऑस्कर विजेता फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने मशहूर हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम क्रूज के साथ ‘मिशन इम्पॉसिबल: घोस्ट प्रोटोकॉल’ में काम किया।
फिटनेस के बेताज बादशाह
67 साल की उम्र पार करने के बाद भी अनिल कपूर आज के युवा अभिनेताओं को मात देते हैं। उनके करियर में 6 फिल्मफेयर और 2 राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं। वह अपनी फिटनेस को लेकर इतने सजग हैं कि लोग अक्सर मजाक में पूछते हैं कि क्या उन्होंने ‘जवान रहने की जड़ी-बूटी’ ढूंढ ली है?
अनिल कपूर आज उन करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो छोटे से कमरे से निकलकर दुनिया जीतने का सपना देखते हैं।
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