आंगई (धौलपुर): राजस्थान के आंगई थाना क्षेत्र से किसानों की बदहाली की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां आवारा गोवंश (Stray Cattle) किसानों के लिए काल बन गए हैं। खेतों में लहलहाती फसलें अब मवेशियों के पैरों तले कुचली जा रही हैं, जिससे इलाके के किसान खून के आंसू रोने को मजबूर हैं। किसानों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन चैन की नींद सो रहा है।
आवारा पशुओं का ‘झुंड’ और किसानों का ‘दर्द’
आंगई क्षेत्र में इन दिनों आवारा पशुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। रात हो या दिन, पशुओं के बड़े-बड़े झुंड खेतों में घुस जाते हैं। किसानों ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीद के साथ बीज बोए थे और खाद-पानी देकर फसल तैयार की थी, लेकिन अब यह फसलें आवारा गोवंश का चारा बन रही हैं।
ग्रामीण किसान घूरे ठाकुर, कमल किशोर मीना, राजेश मीणा और कल्ला ने अपना दुख साझा करते हुए कहा कि वे अब दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ उन्हें अपनी फसलों को बचाने के लिए रात-भर खेतों में जागना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ गोवंश की सुरक्षा और सम्मान का भी ध्यान रखना पड़ता है।
प्रशासन की ‘अनदेखी’ से बढ़ी नाराजगी
किसानों का गुस्सा इस बात पर है कि शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित ज्ञापन सौंपे और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ रहा। पशुओं को गौशाला भेजने या उन्हें नियंत्रित करने के लिए अभी तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
किसानों के मुताबिक, प्रशासन की इस सुस्ती की वजह से वे न तो खेती से मुनाफा कमा पा रहे हैं और न ही पशुपालन का सही लाभ मिल रहा है। उनकी मेहनत और लागत, दोनों ही बर्बाद हो रही हैं।
कृषि विभाग की सलाह: ‘तारबंदी योजना’ है समाधान?
जब इस समस्या को लेकर कृषि विभाग से संपर्क किया गया, तो कृषि पर्यवेक्षक सागर ने एक अलग पहलू सामने रखा। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों की सुरक्षा के लिए ‘तारबंदी योजना’ (Fencing Scheme) चला रही है।
सागर ने कहा, “किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए इस सरकारी योजना का लाभ उठाना चाहिए। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं:”
जमीन की सीमा: किसान के पास कम से कम 2 बीघा जमीन होनी चाहिए।
समूह में आवेदन: अगर किसी छोटे किसान के पास कम जमीन है, तो दो या उससे अधिक किसान मिलकर भी समूह (Group) बनाकर आवेदन कर सकते हैं।
सरकारी मदद: सरकार लघु और सीमांत किसानों को 400 मीटर तक की तारबंदी के लिए अच्छा-खासा अनुदान (Subsidy) प्रदान करती है।
क्या होगा अगला कदम?
हालांकि सरकार तारबंदी की बात कर रही है, लेकिन किसानों का सवाल है कि आखिर आवारा पशुओं का स्थायी समाधान कब होगा? क्या हर किसान के लिए तारबंदी का खर्च उठाना मुमकिन है? फिलहाल, आंगई के किसान अपनी किस्मत और प्रशासन के रवैये को कोसते हुए खेतों की रखवाली में जुटे हैं।
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